अमरावती अस्पताल अग्निकांड तीन नवजातों की मौत पर पांच वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित

अमरावती अस्पताल अग्निकांड तीन नवजातों की मौत पर पांच वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित
महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 24 अगस्त को लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के पांच वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है।

मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 24 अगस्त को लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के पांच वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है।

निलंबित किए गए अधिकारियों में अकोला सर्कल के उप स्वास्थ्य सेवा निदेशक, अमरावती महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), प्रशासनिक अधिकारी और अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं।

सरकार ने इन्हें प्रथम दृष्टि में निगरानी और पर्यवेक्षण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना है। राज्य सरकार का यह कदम एक उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद उठाया गया है। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि आग लगने की इस घटना के दौरान 36 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाकर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया था।

जांच समिति की रिपोर्ट में तकनीकी निरीक्षण और उपकरणों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटरों की समय पर सर्विसिंग नहीं की गई थी, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहे थे, तथा फायर पंप हाउस बंद पाया गया।

रिपोर्ट में सामने आई लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना रवैये और निगरानी में विफलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम-8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, संविदा कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।

जांच में एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया है, जिसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथम दृष्टया खामियां पाए जाने पर फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने और उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और संरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है।

सरकार ने सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा प्रत्येक अस्पताल में नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को लोक निर्माण विभाग, विद्युत, अग्निशमन, बायोटेक्निकल और रखरखाव विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को भी अपने-अपने क्षेत्रों के सभी अस्पतालों का विद्युत और अग्नि सुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट, निगरानी और अनुपालन रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।

वहीं, घटना के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर नवजात शिशुओं को बचाने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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Created On :   9 Sept 2026 10:34 PM IST

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