महिला आरक्षण पर त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा बोले- विपक्ष ने महिलाओं का अपमान किया
अगरतला, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार को दावा किया कि विपक्ष ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए महिलाओं का अपमान किया है। 'इंडिया' गठबंधन महिलाओं के सशक्तीकरण का समर्थन नहीं करता, बल्कि इसके बजाय वह स्वार्थी राजनीति को प्राथमिकता देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अप्रैल को विपक्ष के विरोध के कारण संसद में महिला आरक्षण बिल में संशोधन पास नहीं हो सका। उन्होंने इस संशोधन को भारत में महिला सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी बताया, और कहा कि इसमें राजनीति के भविष्य को बदलने और राष्ट्रीय विकास में अहम योगदान देने की क्षमता है।
अगरतला में राज्य भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन या विपक्ष ने एक बार फिर महिलाओं का अपमान किया है और पूरे देश को वंचित किया है, क्योंकि वे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए बेताब हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे सिर्फ स्वार्थी राजनीति में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने महिला आरक्षण बिल 2023 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर बताया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है। यह एक ऐतिहासिक कानून है जो यह गारंटी देता है कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई प्रतिनिधित्व मिले। यह न केवल महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बल्कि भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
साहा ने बताया कि यह बिल सितंबर 2023 में नए संसद भवन में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान पास किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की राजनीतिक व्यवस्था के भीतर लैंगिक असमानता को खत्म करना है, और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाया गया एक बड़ा कदम है। महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग लगभग तीन दशकों से चली आ रही है।
यह बिल सबसे पहले 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के कार्यकाल के दौरान पेश किया गया था, लेकिन यह पास नहीं हो सका। 1998 और 2003 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कई बार प्रयास किए गए, फिर भी इस बिल को लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि 2010 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान यह राज्यसभा में पास हो गया था, लेकिन लोकसभा में इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। उस समय समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों ने इसका विरोध किया था। आखिरकार, 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, यह बिल दोनों सदनों में भारी बहुमत से पास हो गया।
उन्होंने कहा कि इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी आरक्षण शामिल है। हर चुनाव के बाद परिसीमन प्रक्रिया के जरिए सीटों को रोटेट किया जाएगा, ताकि सभी सीटों पर महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सके। यह कानून 15 साल तक लागू रहेगा, और अगर जरूरी हुआ तो संसद इसे आगे भी बढ़ा सकती है।
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Created On :   23 April 2026 11:46 PM IST












