पाकिस्तान में अभी जारी रहेंगे खर्चों में कटौती और ईंधन बचत के न‍ियम, 13 जून तक बढ़ी समय सीमा

पाकिस्तान में अभी जारी रहेंगे खर्चों में कटौती और ईंधन बचत के न‍ियम, 13 जून तक बढ़ी समय सीमा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अनिश्चितता को देखते हुए पाकिस्तान की संघीय सरकार ने सोमवार को खर्चों में कटौती और ईंधन बचत से जुड़े उपायों को 13 जून तक बढ़ा दिया।

इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अनिश्चितता को देखते हुए पाकिस्तान की संघीय सरकार ने सोमवार को खर्चों में कटौती और ईंधन बचत से जुड़े उपायों को 13 जून तक बढ़ा दिया।

पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थान जियो न्यूज के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मंजूरी के बाद कैबिनेट डिवीजन ने इस फैसले की अधिसूचना जारी की। यह फैसला लागू करने वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया।

नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकारी वाहनों के लिए ईंधन सप्लाई में 50 फीसदी कटौती पहले की तरह जारी रहेगी। साथ ही सरकार ने 60 फीसदी सरकारी वाहनों को सड़कों से बाहर रखने का फैसला भी बरकरार रखा है।

शहबाज शरीफ ने 9 मार्च को टीवी पर देश को संबोधित करते हुए खर्चों में कटौती योजना का ऐलान किया था। यह योजना सभी संघीय सरकारी संस्थानों पर लागू की गई थी, जिनमें मंत्रालय, विभाग, सरकारी कंपनियां, स्वायत्त संस्थाएं, संसद, रक्षा संगठन और न्यायपालिका शामिल हैं। यह घोषणा सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 फीसदी बढ़ोतरी के कुछ दिनों बाद की गई थी।

इस योजना के तहत सरकारी दफ्तरों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया। हालांकि, बैंकिंग सेक्टर और जरूरी सेवाओं को इससे छूट दी गई।

जियो न्यूज के अनुसार, संघीय और प्रांतीय सरकारी विभागों को मौजूदा वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में गैर-जरूरी खर्चों में 20 फीसदी कटौती करने को कहा गया था।

मंत्रियों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा दी गई, सिवाय बेहद जरूरी दौरों के। जरूरी सेवाओं में काम करने वालों को छोड़कर, सरकारी कर्मचारियों में से 50 फीसदी को बारी-बारी से घर से काम करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों के लिए इकोनॉमी क्लास में यात्रा करना अनिवार्य किया गया और खर्च कम करने के लिए आमने-सामने बैठकों की जगह वर्चुअल मीटिंग्स करने पर जोर दिया गया।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 40 दिनों तक संघर्ष चला, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों से हुई थी।

सीजफायर के बाद 11-12 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का पहला दौर हुआ, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद भी होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास तनाव बना हुआ है। यह दुनिया के लिए ऊर्जा सप्लाई का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता माना जाता है।

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Created On :   11 May 2026 10:18 PM IST

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