बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, एक नागरिक की मौत, दो लोग जबरन गायब

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, एक नागरिक की मौत, दो लोग जबरन गायब
बुधवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की ओर से बलूचिस्तान में कम से कम एक आम नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया और दो अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया।

क्वेटा, 13 मई (आईएएनएस)। बुधवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की ओर से बलूचिस्तान में कम से कम एक आम नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया और दो अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया।

ये ताज़ा मामले ऐसे समय में सामने आए हैं जब पूरे प्रांत में कथित तौर पर बिना अदालत के हत्या और जबरन गायब किए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग “पांक” ने बताया कि 19 साल के ड्राइवर बुहरान उद्दीन का शव तुर्बत क्षेत्र (केच जिला) में फेंका हुआ मिला। वह लगभग छह महीने पहले जबरन गायब कर दिए गए थे। उनके शरीर पर गंभीर यातना के साफ निशान थे।

मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, बुहरान उद्दीन को 28 अक्टूबर 2025 को उनके घर से जबरन उठाया गया था। आरोप है कि यह काम पाकिस्तान समर्थित “डेथ स्क्वाड्स” और मिलिट्री इंटेलिजेंस के लोगों ने किया था।

संगठन ने कहा, “छह महीने और 14 दिनों तक उनके परिवार ने बहुत दर्द और अनिश्चितता झेली और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की मांग करते रहे।”

पांक ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बुहरान को “गैरकानूनी तरीके से सरकारी हिरासत में रखा गया, उन्हें किसी भी तरह का कानूनी अधिकार या अदालत में पेशी नहीं दी गई, और आखिर में उनकी हत्या कर दी गई।”

इस मानवाधिकार संगठन ने दो और नागरिकों के जबरन गायब किए जाने की भी कड़ी निंदा की है, जिन्हें कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठाया।

उन्होंने कहा, “ये मामले दिखाते हैं कि बलूचिस्तान और कराची में आम नागरिकों को लगातार जबरन गायब किया जा रहा है, जिससे कानून की प्रक्रिया और बुनियादी मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।”

इसी बीच, बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद ने क्वेटा में 11 मई को मुख्यमंत्री सरफराज बुगती की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें एक कथित आत्मघाती हमले की साजिश और एक बलूच नाबालिग लड़की का नाम लिया गया था।

मानवाधिकार संगठन ने इन आरोपों को “झूठा, गढ़ा हुआ और जबरन कबूलनामों की एक दोहराई जाने वाली प्रक्रिया का हिस्सा” बताया।

बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद के अनुसार, जिस लड़की को मीडिया के सामने दिखाया गया, वह 17 साल की छात्रा हाइरनिसा वाहिद है, जिसे 20 दिसंबर को बलूचिस्तान के हुब चौकी इलाके में रात के समय छापेमारी के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जबरन गायब कर दिया था।

संगठन ने कहा कि महीनों तक बिना किसी संपर्क के हिरासत में रखने के बाद किसी नाबालिग को इस तरह मीडिया के सामने लाना और एक सरकारी कहानी के अनुसार पेश करना गंभीर चिंता पैदा करता है। इससे जबरन दबाव, यातना और दबाव में बयान लेने की आशंका मजबूत होती है।

बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद ने यह भी कहा कि यह तीसरा मामला है जिसमें किसी महिला को लंबे समय तक गायब रखने के बाद इसी तरह मीडिया ट्रायल के लिए पेश किया गया है।

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Created On :   13 May 2026 11:59 PM IST

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