ईरान मुद्दे पर मध्यस्थ बने पाकिस्तान ने सऊदी अरब से कर रखा है गुप्त रक्षा समझौता, रिपोर्ट में खुलासा

ईरान मुद्दे पर मध्यस्थ बने पाकिस्तान ने सऊदी अरब से कर रखा है गुप्त रक्षा समझौता, रिपोर्ट में खुलासा
इस साल अप्रैल में पश्चिम एशिया में अशांति के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूतों और ईरानी डिप्लोमैट्स के बीच उच्च स्तरीय बातचीत होस्ट की गई। वहीं, रियाद ने एक रक्षा समझौते की शर्तों के तहत सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पाकिस्तानी सैन्य फोर्स और एयरक्राफ्ट के आने का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया।

माले, 23 मई (आईएएनएस)। इस साल अप्रैल में पश्चिम एशिया में अशांति के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूतों और ईरानी डिप्लोमैट्स के बीच उच्च स्तरीय बातचीत होस्ट की गई। वहीं, रियाद ने एक रक्षा समझौते की शर्तों के तहत सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पाकिस्तानी सैन्य फोर्स और एयरक्राफ्ट के आने का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अप्रैल में पाकिस्तान ने अमेरिकी दूतों और ईरानी अधिकारियों के बीच अहम वार्ता की मेजबानी की थी। इसी दौरान सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि पाकिस्तानी सैन्य बल और विमान रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पहुंचे हैं। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की तटस्थता पर सवाल उठने लगे।

मालदीव के मीडिया आउटलेट ईट्रुथ एमवी की एक रिपोर्ट में ड्रोप साइट न्यूज की जांच का हवाला देते हुए दावा किया गया कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त रक्षा समझौता मौजूद है। इसके तहत युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान को सऊदी अरब की रक्षा करनी होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर वह रियाद के साथ एक व्यापक रक्षा समझौते से बंधा हुआ था। यह समझौता कभी पाकिस्तान की संसद में पेश नहीं किया गया और आम जनता को भी इसकी जानकारी नहीं थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 का स्ट्रैटजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के बीच हुआ था।

समझौते में कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि लीक दस्तावेजों और आंतरिक आकलनों के मुताबिक यह समझौता पूरी तरह संतुलित नहीं है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान पर सऊदी अरब की रक्षा करने की बाध्यता अधिक है, जबकि सऊदी अरब पाकिस्तान की सुरक्षा, खासकर भारत के खिलाफ को लेकर समान प्रतिबद्धता नहीं दिखाता।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में जब पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता की मेजबानी की, उसी दौरान सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती की घोषणा ने इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया।

उस समय अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत में शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि इन घटनाओं ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति, उसकी रणनीतिक कमजोरियों और सऊदी अरब के प्रति उसकी सैन्य प्रतिबद्धताओं को उजागर कर दिया।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते सार्वजनिक रूप से बताए जाने से कहीं अधिक गहरे और बाध्यकारी हैं। यह रक्षा समझौता पाकिस्तान को ऐसे सैन्य दायित्वों में बांध सकता है, जो उसकी विदेश नीति, घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा हितों के विपरीत जा सकते हैं।

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Created On :   23 May 2026 11:14 PM IST

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