अफगानिस्तान सीमा बंद होने से पाकिस्तान के दवा निर्यात में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट

अफगानिस्तान सीमा बंद होने से पाकिस्तान के दवा निर्यात में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
अफगानिस्तान के साथ व्यापार बाधित होने के कारण पाकिस्तान के दवा निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात 30.26 प्रतिशत घट गया, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इसके मूल्य में 25.53 प्रतिशत की और गिरावट आई। पाकिस्तान के मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, उद्योग जगत ने इस गिरावट के लिए अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद होने को प्रमुख कारण बताया है।

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के साथ व्यापार बाधित होने के कारण पाकिस्तान के दवा निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात 30.26 प्रतिशत घट गया, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इसके मूल्य में 25.53 प्रतिशत की और गिरावट आई। पाकिस्तान के मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, उद्योग जगत ने इस गिरावट के लिए अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद होने को प्रमुख कारण बताया है।

पाकिस्तान के समाचार पत्र ‘द न्यूज’ की गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के दवा उद्योग के सबसे बड़े बाजारों में शामिल रहा है। सीमा बंद होने और व्यापारिक गतिविधियां बाधित होने से इस उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात घटकर 31.90 करोड़ डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 45.74 करोड़ डॉलर था। इस तरह निर्यात के मूल्य में 13.84 करोड़ डॉलर की कमी आई।

निर्यात की मात्रा में भी गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने 1,12,517 मीट्रिक टन फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 83,104 मीट्रिक टन रह गया। इस दौरान निर्यात की मात्रा में 26.14 प्रतिशत यानी 29,413 मीट्रिक टन की कमी आई।

गिरावट का सिलसिला चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी जारी रहा। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच पाकिस्तान का दवा निर्यात घटकर 7.33 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 9.84 करोड़ डॉलर था। इस तरह निर्यात आय में 2.51 करोड़ डॉलर यानी 25.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इन आंकड़ों में सर्जिकल उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात शामिल नहीं है।

अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी अफगानिस्तान को पाकिस्तान के दवा उद्योग के प्रमुख निर्यात बाजार के रूप में रेखांकित किया गया है। ‘बिजनेस रिपोर्टर’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 15.568 करोड़ डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था। यह उस वर्ष पाकिस्तान के कुल 45.7456 करोड़ डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात का लगभग 34.1 प्रतिशत था।

पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (पीपीएमए) के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने ‘द न्यूज’ से बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान के साथ व्यापार निलंबित होने से पाकिस्तान के दवा उद्योग और राष्ट्रीय राजकोष को बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका असर अफगानिस्तान के मरीजों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें अब अपेक्षाकृत महंगी दवाओं की ओर रुख करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीपीएमए ने इस मुद्दे को पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया है। संघीय योजना मंत्री अहसान इकबाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाने और पाकिस्तान से अफगानिस्तान को दवाओं का निर्यात दोबारा शुरू करने के रास्ते तलाशने का आश्वासन दिया था। हालांकि, तौकीर उल हक ने इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। दोनों देशों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा डूरंड रेखा है, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान तत्कालीन भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए खींचा गया था।

अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हो गए। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल सीमा पार हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादी समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएसआईएस-के), द्वारा किया जा रहा है। वहीं, अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और पाकिस्तान पर अपनी आंतरिक समस्याओं के लिए उसे जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, सीमा पार हिंसा के बाद अक्टूबर 2025 से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा बंद है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है। वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी, चिकित्सा उपचार के लिए सीमा पार यात्रा में बाधा और स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर जैसे परिणाम सामने आए हैं। इसके अलावा, सीमा बंद होने से राजनयिक संबंधों में तनाव बढ़ा है और कारोबारियों को वैकल्पिक क्षेत्रीय व्यापार मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं।

काबुल से आई रिपोर्टों के मुताबिक, अफगानिस्तान की दवा आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय तक पाकिस्तान पर काफी हद तक निर्भर रही। दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव और सीमा बंद होने की घटनाओं ने इस निर्भरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है। अब अफगानिस्तान दवाओं की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक साझेदारों की ओर रुख कर रहा है। इससे एक ओर पाकिस्तान के दवा उद्योग के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान अपनी चिकित्सा आपूर्ति व्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

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