पीएम मोदी के लाल किले के भाषणों की औसत और कुल अवधि सबसे अधिक, कम संबोधनों के बावजूद इंदिरा और राजीव गांधी से आगे
नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से दिए गए स्वतंत्रता दिवस के संबोधनों की औसत अवधि के मामले में अपने सभी पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों से काफी आगे हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संकलित आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के प्रत्येक संबोधन की औसत अवधि 91 मिनट रही है। यह दूसरे सबसे अधिक औसत समय 52 मिनट वाले पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव से भी लगभग दोगुनी है। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में विकास, नीतिगत घोषणाओं और राष्ट्रीय लक्ष्यों का विस्तृत खाका प्रस्तुत करते हैं।
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि दशकों के दौरान स्वतंत्रता दिवस के भाषणों की अवधि लगातार बढ़ी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषणों की औसत अवधि 24 मिनट रही, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी की 30 मिनट, इंदिरा गांधी की 32 मिनट, मनमोहन सिंह की 42 मिनट, राजीव गांधी की 47 मिनट और पी.वी. नरसिम्हा राव की 52 मिनट रही।
प्रधानमंत्री मोदी की औसत अवधि जहां 91 मिनट है, वहीं कुल बोलने के समय के मामले में भी वह सबसे आगे हैं। 13 स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में उन्होंने कुल 1,177 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया है। यह इंदिरा गांधी के 16 भाषणों में 504 मिनट, मनमोहन सिंह के 10 भाषणों में 417 मिनट और जवाहरलाल नेहरू के 17 भाषणों में 400 मिनट से कहीं अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की तुलना में कम बार लाल किले से संबोधित करने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी का कुल भाषण समय उनसे दोगुने से भी अधिक है। यह आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं कि कम अवसरों के बावजूद उनका कुल संबोधन समय सबसे अधिक रहा है।
जहां जवाहरलाल नेहरू लगातार 17 बार स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करने का रिकॉर्ड रखते हैं और इंदिरा गांधी 16 संबोधनों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी के 13 भाषणों की कुल अवधि सबसे अधिक दर्ज की गई है।
अन्य प्रधानमंत्रियों में पी.वी. नरसिम्हा राव ने पांच भाषणों में 259 मिनट, राजीव गांधी ने पांच संबोधनों में 233 मिनट और अटल बिहारी वाजपेयी ने छह भाषणों में 177 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया।
पिछले एक दशक से अधिक समय में प्रधानमंत्री मोदी के लंबे और विषयवस्तु से भरपूर लाल किले के संबोधनों ने एक नई परंपरा स्थापित की है, जिसमें वे विकसित भारत-2047 जैसे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्यों का रोडमैप प्रस्तुत करते हैं। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि स्वतंत्रता दिवस के भाषणों की अवधि देश के विकास के बढ़ते एजेंडे और व्यापक दृष्टिकोण के साथ लगातार बढ़ी है।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   15 Aug 2026 5:46 PM IST












