सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करे कर्नाटक सरकार, जीबीए चुनाव कराए भाजपा नेता नारायणस्वामी
बेंगलुरु, 10 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने शुक्रवार को राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करने और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के चुनाव कराने का आग्रह किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार हार के डर से चुनाव में देरी करने की कोशिश कर रही है।
राज्य भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नारायणस्वामी ने कहा कि बेंगलुरु के निवासी लंबे समय से निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए और जीबीए चुनाव कराने चाहिए। कांग्रेस सरकार के पास चुनाव टालने के कई कारण हैं। बेंगलुरु खराब बुनियादी ढांचे, गड्ढों वाली सड़कों, कचरे की समस्या और बारिश के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार को मतदाताओं का सामना करने से डर लगता है।"
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ढांचे के तहत बेंगलुरु को पांच नगर निगमों में बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, "उन्होंने केम्पेगौड़ा के बेंगलुरु को पांच निगमों में इस उम्मीद में बांट दिया है कि अगर वे कुछ जगहों पर हार भी जाते हैं, तो भी एक या दो निगम जीतकर अपना प्रतिनिधित्व बनाए रख सकते हैं।"
नारायणस्वामी ने चुनाव कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय बढ़ाने की राज्य सरकार की मांग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के चल रहे 'विशेष गहन संशोधन' का इस्तेमाल सिर्फ बहाने के तौर पर किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया, "उन्हें एहसास है कि अगर अभी चुनाव हुए तो एक भी निगम जीतना मुश्किल होगा। इसलिए, उन्होंने एसआईआर का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।"
नारायणस्वामी ने मतदाता सूची संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि एसआईआर से किसी के भी वोटिंग अधिकार नहीं छीने जाते, बल्कि इसका मकसद मतदाता सूची से अयोग्य लोगों के नाम हटाना है।
उन्होंने कहा, "मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट में कैसे रह सकते हैं? उन्हें हटाना ही होगा। इसी तरह, अगर बिना वैध दस्तावेजों के लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं, तो उनके नाम भी हटाए जाने चाहिए।"
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान ग्रुप में फॉर्म भरे जा रहे थे। भाजपा ने यह मामला चुनाव आयोग के ध्यान में लाया है। बूथ लेवल ऑफिसर्स और बूथ लेवल एजेंट्स को घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना चाहिए।
नारायणस्वामी ने बेंगलुरु के इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करते हुए कांग्रेस सरकार पर पिछले तीन सालों में शहर के विकास को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, "बेंगलुरु का विकास कोई ऐसी चीज नहीं है, जिस पर बस बातें होती रहें, इसके लिए काम करने की जरूरत है। क्या वे पिछले तीन सालों से सो रहे थे? मौजूदा मुख्यमंत्री खुद बेंगलुरु के इंचार्ज थे, तब उन्होंने इन मुद्दों पर ध्यान क्यों नहीं दिया?"
नारायणस्वामी ने सरकार से अपील की कि मानसून के जोर पकड़ने से पहले सड़कों के गड्ढों को तुरंत ठीक किया जाए, ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाया जाए और कचरा हटाया जाए। अगर जोरदार बारिश जारी रही, तो लोगों को नाव से चलना पड़ सकता है। सरकार को यह पक्का करना चाहिए कि बारिश का पानी निकालने वाले नाले साफ हों और पानी आसानी से बह सके।
भाजपा नेता ने सड़क मरम्मत के कामों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले जहां गड्ढों की मरम्मत बहुत कम खर्च में हो जाती थी, वहीं हाल के कामों में बहुत ज्यादा खर्च हुआ है। लोग कहते हैं कि एक गड्ढे को ठीक करने में लगभग 1 लाख रुपए का खर्च आया है। मुख्यमंत्री को इन आरोपों की जांच का आदेश देना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में इतनी रकम से कुआं खोदा जा सकता है और पीने का पानी मुहैया कराया जा सकता है।
नारायणस्वामी ने कांग्रेस सरकार से यह भी अपील की कि वह सिर्फ बेंगलुरु पर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास पर ध्यान दे। उन्होंने परमानेंट रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (पीआरसी) जारी करने के प्रस्ताव पर ऐसे उपाय को लागू करने के राज्य के अधिकार पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, "वे परमानेंट रेजिडेंसी सर्टिफिकेट जारी करने वाले कौन होते हैं? परमानेंट रेजिडेंसी का सीधा संबंध नागरिकता से है, और यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।"
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Created On :   10 July 2026 9:41 PM IST












