'मेरे आंसुओं से दादी के लिए मेरा प्यार मत आंकिए', एस. जानकी की पोती अप्सरा का पोस्ट वायरल
चेन्नई, 14 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा की दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी ने अपनी आवाज से कई दशकों तक करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया। उनके निधन के बाद जहां देशभर के प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, वहीं उनका परिवार भी इस गहरे दुख से गुजर रहा है। इसी बीच उनकी पोती अप्सरा वैद्युला ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया।
इस पोस्ट में उन्होंने न सिर्फ अपनी दादी को याद किया, बल्कि उन लोगों को भी जवाब दिया, जो पिछले कुछ दिनों से उनके दुख और भावनाओं पर सवाल उठा रहे थे। अप्सरा ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्यार और शोक को उसके आंसुओं से नहीं आंका जाना चाहिए।
अप्सरा वैद्युला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए सबसे पहले अपनी बड़ी बहन वर्षा को याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी दादी एस. जानकी की सबसे प्रिय इंसान उनकी बड़ी बहन थीं। अप्सरा ने लिखा, ''मेरी दादी की दुनिया में सबसे पसंदीदा शख्स मेरी बड़ी बहन वर्षा थीं। दोनों एक-दूसरे से बहुत मिलती-जुलती थीं। उनके बीच ऐसा रिश्ता था, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता। दोनों एक-दूसरे को बिना कुछ कहे समझ जाती थीं। ऐसा लगता था जैसे वे एक-दूसरे के लिए ही बनी थीं।''
उन्होंने आगे लिखा, ''मैं नहीं चाहती कि दुनिया यह भूल जाए कि आज जहां मैं हूं, वहां मेरी बहन वर्षा होनी चाहिए थी। वही हमारी दादी की देखभाल करती और वह सारी जिम्मेदारियां निभाती, जो आज मेरे हिस्से में हैं। अगस्त 2023 में वर्षा का निधन हो गया था और हमारा परिवार आज तक उस दुख से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। दुख कभी खत्म नहीं होता, बस इंसान उसके साथ जीना सीख जाता है। मुझे सिर्फ इस बात से सुकून मिलता है कि अब दादी और वर्षा फिर से एक-दूसरे के साथ हैं।''
अप्सरा ने आगे उन लोगों को भी जवाब दिया, जो उनके शोक जताने के तरीके पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने लिखा, ''पिछले कुछ दिनों से मैंने देखा है कि लोग मेरे दुख पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि उन्हें मेरी आंखों में आंसू नहीं दिख रहे। कृपया मेरी दादी के लिए मेरे प्यार को मेरे आंसुओं से मत आंकिए।''
उन्होंने कहा, ''दादी ने हमें सिखाया कि किसी इंसान की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसके लिए प्यार कभी खत्म नहीं होता। जिंदगी के अनुभवों ने मुझे मेरी इच्छा से कहीं ज्यादा मजबूत बना दिया है। दुख हमेशा शोर मचाकर सामने नहीं आता। कई बार वह शांत, स्थिर और पूरी तरह निजी होता है।''
अप्सरा ने अपने पोस्ट में कहा कि सार्वजनिक जीवन का हिस्सा होने का मतलब अक्सर अफवाहों, अटकलों और लोगों की बनाई कहानियों के साथ जीना होता है। उन्होंने लिखा, ''यह देखकर दुख होता है कि लोग ऐसे परिवार के बारे में राय बना लेते हैं, जिसे वे वास्तव में जानते तक नहीं हैं। मैं चाहती हूं कि लोग मेरी दादी को उनके असली रूप में जानें। वह बेहद सरल, दयालु और विनम्र थीं। वह हर व्यक्ति में अच्छाई देखती थीं। मेरी बहन वर्षा भी बिल्कुल ऐसी ही थी।''
अप्सरा ने पोस्ट के आखिर में लिखा कि उनकी दादी और बहन, दोनों में एक मासूम और बच्चों जैसी खुशी हमेशा बनी रहती थी। वे जहां भी जाती थीं, अपने साथ एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा लेकर जाती थीं। उनसे मिलने वाला लगभग हर व्यक्ति उन्हें तुरंत पसंद करने लगता था। अब दोनों एक साथ हैं और यही सोच मुझे सबसे ज्यादा सुकून देती है।
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Created On :   14 July 2026 12:35 PM IST












