जम्मू-कश्मीर किश्तवाड़ में सर्विस राइफल के साथ एसपीओ लापता, सुरक्षा बलों ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन
जम्मू, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) अपनी सर्विस राइफल के साथ लापता हो गया है। इस संबंध में अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, 55 वर्षीय स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) बशीर अहमद किश्तवाड़ जिले से अपनी सर्विस राइफल के साथ लापता हो गए हैं।
सुरक्षा बलों ने लापता एसओपी को खोजने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। खबरों के अनुसार, बुधवार सुबह एसपीओ त्रिघम पुलिस पिकेट पर अपनी ड्यूटी से निकलकर वनिपोरा त्रिघम स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए थे।
अधिकारी ने बताया, “वे अपनी सरकारी एसएलआर सर्विस राइफल के साथ लापता हो गए हैं। जब वे घर नहीं पहुंचे, तो उनके परिवार ने अधिकारियों को सूचित किया। जांचकर्ता सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके लापता होने के समय इलाके में भारी बारिश और खराब मौसम था। इससे आशंका जताई जा रही है कि शायद वे किसी खड़ी पहाड़ी से गलती से फिसल गए हों।”
अधिकारियों ने बताया, “पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की कई टीमें उनके बारे में पता लगाने के लिए आसपास के जंगलों, आने-जाने के रास्तों और स्थानीय गांवों में तलाशी ले रही हैं।”
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उनके लापता होने से जुड़ी परिस्थितियों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।
उनके लापता होने के समय उस इलाके में भारी बारिश हुई थी। खराब मौसम के कारण एसपीओ के किसी पहाड़ी टीले से गलती से फिसल जाने की संभावना अभी तक पुष्ट नहीं हुई है और उनके लापता होने से जुड़ी परिस्थितियां अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस में लगभग 32,000 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) कार्यरत हैं। जम्मू-कश्मीर में 'स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स' (एसपीओ) को 'जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिनियम, 1983' की धारा 18 के तहत नियुक्त किया जाता है। इनका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में नियमित पुलिस बलों की सहायता करना है।
जम्मू-कश्मीर गृह विभाग ने 'जम्मू-कश्मीर पुलिस नियम, 1960' में संशोधन किया है, जिसके तहत कांस्टेबल की भर्ती में एसपीओ और सेवा में कार्यरत 'फॉलोअर्स' (सहायक कर्मचारियों) के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। कांस्टेबल के पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में से 15 प्रतिशत पद योग्य एसपीओ के लिए और 5 प्रतिशत पद सेवा में कार्यरत फॉलोअर्स की पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए आरक्षित किए गए हैं।
कम से कम 3 साल तक सेवा दे चुके एसपीओ, खेलकूद (राष्ट्रीय/राज्य स्तर) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले या आईटीआई/एआईसीटीई डिप्लोमा धारक एसपीओ को कांस्टेबल या फॉलोअर के पदों पर स्थायी रूप से शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए अधिकतम आयु सीमा में छूट दी गई है, जिसके तहत 40 वर्ष की आयु तक के लोग पात्र हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारी) नियमित सिविल पदों पर नहीं होते हैं। इसलिए, उन्हें अनुच्छेद 311 के तहत मिलने वाले पूर्ण संवैधानिक सुरक्षा कवच या नियमित विभागीय जांच की प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलता है।
हाल के न्यायिक फैसलों के अनुसार, हालांकि एसपीओ को सेवा से हटाया जा सकता है, लेकिन यदि उन्हें किसी कदाचार के आरोप में हटाया जा रहा है या उनके रिकॉर्ड (जैसे उम्र या बिना बताए अनुपस्थित रहने के आरोप) को लेकर कोई विवाद है तो अधिकारियों को उन्हें कम से कम एक नोटिस देना होगा और अपना पक्ष रखने का मौका भी देना होगा।
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Created On :   15 Oct 2026 11:22 PM IST












