तमिलनाडु किसान कृषि बजट से पहले सलाह-मशविरा चाहते हैं, फसलों के लिए सहायता उपायों पर जोर

तमिलनाडु किसान कृषि बजट से पहले सलाह-मशविरा चाहते हैं, फसलों के लिए सहायता उपायों पर जोर
तमिलनाडु भर के किसानों ने उम्मीद जताई है कि टीवीके के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार एक अलग कृषि बजट पेश करने की प्रथा को जारी रखेगी और अपने प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले किसान समुदायों के साथ व्यापक सलाह-मशविरा करेगी।

तिरुची, 18 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु भर के किसानों ने उम्मीद जताई है कि टीवीके के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार एक अलग कृषि बजट पेश करने की प्रथा को जारी रखेगी और अपने प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले किसान समुदायों के साथ व्यापक सलाह-मशविरा करेगी।

किसान संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि बजट पेश करने से पहले वह किसानों और संबंधित पक्षों के साथ सीधे बातचीत करे ताकि उनकी चिंताओं और प्राथमिकताओं को समझा जा सके, क्योंकि पिछले वर्षों में अपनाए गए सलाह-मशविरे के तरीके से यह सुनिश्चित करने में मदद मिली थी कि किसानों की आवाज नीतिगत फैसलों और कल्याणकारी उपायों में शामिल हो।

तमिलनाडु 2021–22 के वित्तीय वर्ष के दौरान देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने एक अलग कृषि बजट पेश किया। बजट पेश करने से पहले, पिछली सरकार ने पूरे राज्य में 28 सलाह-मशविरा बैठकें आयोजित की थीं, जिनमें किसानों, किसान संघों, जैविक खेती समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि मशीनरी निर्माताओं, बीज उत्पादकों, व्यापारियों, डेयरी और मुर्गी पालन करने वाले किसानों, मछुआरों, विशेषज्ञों और चुने हुए प्रतिनिधियों सहित विभिन्न संबंधित पक्षों को शामिल किया गया था।

सीधी बातचीत के अलावा, बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले याचिकाओं और ईमेल के जरिए भी सुझाव एकत्र किए गए थे।

कृषि बजट में फसलों में विविधता लाने, खेती के तरीकों में नवाचार, बाजार तक बेहतर पहुंच, जैविक खेती को बढ़ावा देने, पोषण से संबंधित पहलों और खेती के तरीकों में तकनीकी बदलावों पर जोर दिया गया था। इसमें किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सब्सिडी और प्रोत्साहन से संबंधित घोषणाएं भी शामिल थीं।

किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सलाह-मशविरा बैठकों ने किसानों को अपनी चिंताओं और प्राथमिकता वाली मांगों को खुलकर सामने रखने का अवसर दिया। उनके अनुसार, बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले चर्चाओं में भाग लेने के लिए किसान संघों के चुने हुए प्रतिनिधियों को चेन्नई भी आमंत्रित किया गया था।

किसानों ने नई सरकार से अपना पहला बजट तैयार करने की उम्मीद के साथ सुझाव दिया है कि भले ही समय कम हो, फिर भी क्षेत्र-वार सलाह-मशविरा आयोजित किया जाना चाहिए। उनका मानना ​​है कि ऐसी बैठकों से स्थानीय चुनौतियों और क्षेत्र-विशेष की कृषि प्राथमिकताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, कुछ किसान नेताओं ने तर्क दिया कि केवल एक अलग कृषि बजट ही इस क्षेत्र की मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा, जब तक कि राज्य को पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिल जाए। उन्होंने कहा कि लंबित निधियों को प्राप्त करना और धान तथा गन्ने के लिए खरीद मूल्यों से संबंधित वादों को पूरा करना अधिक तत्काल राहत प्रदान करेगा और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाएगा।

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Created On :   18 May 2026 11:43 PM IST

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