तमिलनाडु सरकार ने सॉलिड वेस्ट कंसल्टेंसी टेंडर वापस लिए, सीपीआई(एम)-सीपीआई ने किया स्वागत

तमिलनाडु सरकार ने सॉलिड वेस्ट कंसल्टेंसी टेंडर वापस लिए, सीपीआई(एम)-सीपीआई ने किया स्वागत
तमिलनाडु सरकार ने 12 नगर निगमों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (नगरपालिका का ठोस कचरा) इकट्ठा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए डिटेल्ड फिजिबिलिटी रिपोर्ट (डीएफआर) तैयार करने वाली कंसल्टेंसी फर्मों को नियुक्त करने के लिए जारी किए गए टेंडर वापस ले लिए हैं।

चेन्नई, 28 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने 12 नगर निगमों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (नगरपालिका का ठोस कचरा) इकट्ठा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए डिटेल्ड फिजिबिलिटी रिपोर्ट (डीएफआर) तैयार करने वाली कंसल्टेंसी फर्मों को नियुक्त करने के लिए जारी किए गए टेंडर वापस ले लिए हैं।

सरकार के इस कदम की आलोचना हो रही थी। इसको लेकर प्राइवेटाइजेशन (निजीकरण) का हवाला दिया जा रहा था। तमिलनाडु अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की ओर से जारी किए गए टेंडर कुछ ही दिनों में रद्द कर दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन टेंडरों को म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) के निजीकरण की नई कोशिश के तौर पर गलत समझा गया।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम 2022 से ही पीपीपी मॉडल के तहत चल रहा है और कंसल्टेंसी का प्रस्ताव सिर्फ मौजूदा सिस्टम का आकलन करने और उसमें सुधार करने के लिए था।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इस टेंडर का मकसद ऐसे कंसल्टेंट नियुक्त करना था जो फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर सकें और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने के तरीकों पर विचार कर सकें। उन्होंने कहा कि इसे निजीकरण की नई पहल समझ लिया गया था, इसलिए सरकार ने इसे वापस लेने और पूरे ढांचे की दोबारा समीक्षा करने का फैसला किया है।"

सूत्रों ने बताया कि शहरी विकास विभाग अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करेगा, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था में कामकाज से जुड़ी कमियों और खामियों की पहचान करेगा और पूरी जांच-पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा।

20 जून को टीएनयूआईएफएसएल ने अवादी, होसुर, ताम्बरम, वेल्लोर, कोयंबटूर, इरोड, सलेम, तिरुप्पुर, मदुरै, थूथुकुडी, तिरुचि और तिरुनेलवेली में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए डीएफआर तैयार करने और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी सर्विस देने के लिए कंसल्टेंसी फर्मों से बोलियां (बिड) मंगवाई थीं। 4.05 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कंसल्टेंसी काम को तीन पैकेज में बांटा गया था और इसके लिए 'प्रोजेक्ट डेवलपमेंट ग्रांट फंड' से पैसा मिलना था।

अधिकारियों का कहना था कि इस कवायद का मकसद मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की कमियों को दूर करके और काम-काज के बेहतर मॉडल की पहचान करके वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की कार्यक्षमता को बढ़ाना था। हालांकि, इस प्रस्ताव की राजनीतिक दलों और सफाई कर्मचारियों की यूनियनों ने कड़ी आलोचना की।

सरकार के टेंडर वापस लेने के फैसले का सीपीआई (एम) और सीपीआई ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक कदम है।

सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को, जिन्हें कभी स्थायी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया जाता था, अब ज्यादातर अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट-आधारित नौकरियों में धकेल दिया गया है, जिससे असुरक्षा और शोषण बढ़ा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और आजीविका की रक्षा करते हुए पब्लिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करे।

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Created On :   28 Jun 2026 3:49 PM IST

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