त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद सुलझाने को पहली आधिकारिक स्तर की बैठक, दो अध्ययन समितियां बनेंगी
अगरतला, 11 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा और मिजोरम ने लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय सीमा विवाद के समाधान की दिशा में गुरुवार को अगरतला में पहली आधिकारिक स्तर की बैठक की। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को कहा कि दोनों राज्यों ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि उन्होंने पहले ही मिजोरम के साथ बातचीत की पहल की थी ताकि सीमा विवाद का समाधान आपसी चर्चा से निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि 4 जून को शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के 73वें पूर्ण अधिवेशन के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से चर्चा की थी।
साहा ने कहा, "मैंने प्रस्ताव रखा था कि पहले अधिकारियों के स्तर पर बैठक हो, जिसके बाद दोनों मुख्यमंत्री इस विवाद के समाधान के लिए बातचीत करें। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति जताई।"
बैठक में यह फैसला किया गया कि सीमा विवाद और उससे जुड़े जमीनी मुद्दों का अध्ययन करने के लिए दो अध्ययन समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां विवादित क्षेत्रों का जमीनी स्तर पर निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारियों के स्तर पर अगली बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में त्रिपुरा के गृह सचिव अभिषेक सिंह और मिजोरम के गृह सचिव वनलालमाविया ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया।
त्रिपुरा की दक्षिण, पश्चिम और उत्तर दिशा में बांग्लादेश से सीमा लगती है। राज्य की असम के साथ 53 किलोमीटर और मिजोरम के साथ 109 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है।
त्रिपुरा और मिजोरम के बीच सीमा विवाद कई वर्षों से लंबित है। विवादित इलाकों में जब भी कोई राज्य विकास या निर्माण कार्य शुरू करता है, दूसरा राज्य उस पर आपत्ति जताता रहा है।
मई 2025 में उत्तर त्रिपुरा जिले के फुलडुंगसेई गांव में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की 'स्वदेश दर्शन' योजना के तहत बन रही पर्यटन इमारत पर अज्ञात हमलावरों ने मध्यम तीव्रता के विस्फोटक फेंके थे, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद दोनों राज्यों की पुलिस ने संयुक्त रूप से इलाके का दौरा किया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
फुलडुंगसेई गांव को लेकर दोनों राज्यों के स्थानीय लोग लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि यह गांव त्रिपुरा और मिजोरम दोनों की सीमा में आता है। इसी वजह से यह इलाका दोनों राज्यों के बीच सबसे संवेदनशील विवादित क्षेत्रों में शामिल है।
घटना के बाद त्रिपुरा सरकार ने यह मामला आधिकारिक माध्यम से मिजोरम के समक्ष उठाया था। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर त्रिपुरा और मिजोरम के मामित जिले के प्रशासन तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया) के अधिकारियों के बीच भी विवादित सीमा क्षेत्रों को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
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Created On :   11 Sept 2026 9:37 PM IST












