वाईएसआर कांग्रेस ने परिसीमन का स्वागत किया, आश्वासन को विधेयक में शामिल करने की मांग

वाईएसआर कांग्रेस ने परिसीमन का स्वागत किया, आश्वासन को विधेयक में शामिल करने की मांग
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में परिसीमन प्रक्रिया का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने यह मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को विधेयक में कानूनी रूप से शामिल किया जाए।

अमरावती, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में परिसीमन प्रक्रिया का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने यह मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को विधेयक में कानूनी रूप से शामिल किया जाए।

वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिधुन रेड्डी ने लोकसभा में संबोदन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने प्रत्येक राज्य की मौजूदा संख्या बल के आधार पर सीटों में आनुपातिक वृद्धि की बात कही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे कानून में भी शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने आंध्र प्रदेश के विभाजन के समय को याद किया, जब कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही राज्य को 'विशेष श्रेणी का दर्जा' देने का वादा किया था। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि यह केवल एक मौखिक वादा था, जिसे कभी पूरा नहीं किया गया। इसी अनुभव से सीख लेते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत की पुनरावृत्ति से बचने के लिए, वर्तमान आश्वासन को विधेयक का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

मिधुन रेड्डी ने यह भी बताया कि इसी आश्वासन को दर्शाने वाला एक संशोधन पहले ही पेश किया जा चुका है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस संशोधन को स्वीकार कर ले, ताकि गृह मंत्री का बयान कानूनी रूप से बाध्यकारी बन जाए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर असमानताओं को दूर करते हुए सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि परिसीमन के बाद राज्यों के भीतर कोई नया क्षेत्रीय असंतुलन पैदा न हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए जिन मानदंडों का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हीं मानदंडों को राज्यों के भीतर भी लागू किया जाना चाहिए।

वाईएसआरसीपी सांसद ने परिसीमन आयोग की संरचना को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि यदि राज्य के स्पीकर विपक्षी दलों को प्रतिनिधित्व नहीं देते हैं, तो इससे अनुचित कार्यप्रणालियां सामने आ सकती हैं। उन्होंने मांग की कि विधेयक में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जाने चाहिए, जो सत्ताधारी और विपक्षी, दोनों ही पक्षों के सभी दलों को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकें।

उन्होंने कहा कि परिसीमन एक राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया होनी चाहिए और इसका इस्तेमाल विपक्ष को दबाने या हाशिए पर धकेलने के एक हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।

महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर मिधुन रेड्डी ने अपनी पार्टी के पुरजोर समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से ही महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और वह 'महिला आरक्षण विधेयक' का किसी भी रूप में स्वागत करती है।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा की गई पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों और नामित पदों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया और कल्याणकारी योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 32 लाख घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए गए।

इस दौरान उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त और कड़े कानूनों की पुरजोर मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में कुछ विधायक फोन कॉल और मैसेज के जरिए महिलाओं को परेशान करने में शामिल थे और कहा कि इसके सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

सांसद ने इस बात पर चिंता जताई कि शिकायत करने के लिए आगे आने वाली महिलाओं को खुद ही परेशान किया गया और आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, चाहे वे किसी भी पद पर हों।

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Created On :   17 April 2026 6:17 PM IST

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