आईआईटी मद्रास के डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड से फंडिंग शुरू किए जाने की घोषणा
चेन्नई, 26 सितंबर (आईएएनएस)। डीप-टेक स्टार्टअप्स को लंबे समय तक पूंजी और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने बड़ी पहल की है। आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स ने मिलकर 'आईआईटी मद्रास यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड' लॉन्च किया है। इसके जरिए 600 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपए तक की पूंजी जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह फंड मुख्य रूप से आईआईटी मद्रास के इकोसिस्टम से निकलने वाले या उससे जुड़े डीप-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने पर केंद्रित रहेगा। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को तकनीकी विशेषज्ञता, मेंटरशिप और संस्थान के नेटवर्क का लाभ भी मिलेगा। आईआईटी मद्रास ने फंड के सफलतापूर्वक शुरुआती चरण यानी 'फर्स्ट क्लोज' तक पहुंचने की भी घोषणा की है।
इस पहल में आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्रों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। फंड में अब तक 150 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश पूर्व छात्रों की ओर से किया जा चुका है।
फंड शुरू करने का महत्वपूर्ण उद्देश्य भारतीय डीप-टेक सेक्टर में 'पेशेंट कैपिटल' यानी ऐसी पूंजी की कमी को दूर करना है, जिसमें निवेशक नई और जटिल तकनीक को विकसित होने तथा व्यावसायिक रूप लेने के लिए पर्याप्त समय देते हैं।
डीप-टेक स्टार्टअप्स को सामान्य स्टार्टअप्स की तुलना में टेक्नोलॉजी विकसित करने, परीक्षण करने और उसे बाजार तक पहुंचाने में अपेक्षाकृत लंबा समय लग सकता है। नया फंड इसी विकास चक्र के दौरान कंपनियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देने पर केंद्रित होगा।
आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क एंड इनक्यूबेशन सेल के ग्रुप सीईओ नटराजन मालुपिल्लई के अनुसार, संस्थान के पास रिसर्च एंड डेवलपमेंट में काम करने वाली बड़ी कंपनियों से लेकर शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स तक का मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम है।
उन्होंने कहा कि 600 करोड़ रुपए से ज्यादा आकार वाला यह फंड ऐसी 24 से 30 कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखता है जो भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
इस पहल का लक्ष्य केवल अलग-अलग स्टार्टअप्स में निवेश करना नहीं है। इसके जरिए भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश को फ्रंटियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे ले जाने का प्रयास भी किया जाएगा।
इस वेंचर कैपिटल फंड का खास फोकस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आधारित और इंजीनियरिंग पर केंद्रित डीप-टेक कंपनियों पर रहेगा।
फंड जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देगा, उनमें रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, डिफेंस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक फ्रंटियर टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा शुरुआती चरण की उन डीप-टेक कंपनियों का होगा जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 3-4 तक पहुंच चुकी हैं।
फंड की करीब 60 प्रतिशत राशि पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए इस्तेमाल करने की योजना है, जबकि बाकी राशि आगे के निवेश राउंड के लिए सुरक्षित रखी जाएगी।
आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स मिलकर फंड का रणनीतिक पोर्टफोलियो तैयार करेंगे। इसमें बड़ी संख्या में कंपनियां व्यापक आईआईटी मद्रास इकोसिस्टम से आने की उम्मीद है। इसके अलावा, देश के दूसरे हिस्सों में उभर रहे संभावनाशील डीप-टेक स्टार्टअप्स को भी इसमें जगह मिल सकती है।
यह पहल पिछले साल आईआईटी मद्रास के संगम कार्यक्रम में की गई घोषणा को आगे बढ़ाती है। इसका उद्देश्य ऐसा समर्पित निवेश तंत्र तैयार करना था जो संस्थान के रिसर्च, इनोवेशन और उद्यमिता इकोसिस्टम के साथ मिलकर उभरती तकनीकों को बड़े पैमाने के उत्पादों और कंपनियों में बदलने में मदद कर सके।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने संगम 2026 के दौरान फंडिंग के लिए चुने गए स्टार्टअप्स की सूची की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना में भारत एक स्टार्टअप नेशन होगा। उनके मुताबिक, आईआईटी मद्रास और यूनिकॉर्न इंडिया का यह वीसी फंड उभरते स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने और बड़ी कंपनियों के रूप में विकसित होने में मदद करने की दिशा में एक प्रयास है।
आईआईटी मद्रास के डीन (एलुमनाई और कॉर्पोरेट संबंध) प्रोफेसर अश्विन महालिंगम ने डीप-टेक उद्यमिता को बढ़ावा देने में पूर्व छात्रों की पूंजी की अहमियत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, इस तरह का वीसी फंड पूर्व छात्रों को संस्थान में योगदान से एक कदम आगे बढ़कर उनके इनोवेशन इकोसिस्टम के विकास में निवेश का अवसर देता है।
फंड से जुड़ी घोषणा आईआईटी मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के सातवें वार्षिक सम्मेलन 'संगम 2026' के अवसर पर की गई। कार्यक्रम 26 सितंबर को बेंगलुरु में आयोजित किया गया। इस साल सम्मेलन की थीम 'आत्मनिर्भर भारत' रखी गई है। सम्मेलन में पूर्व छात्रों, फैकल्टी, विद्यार्थियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाया गया है।
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Created On :   26 Sept 2026 8:19 PM IST












