इनोवेशन, डिजिटलीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तय करेंगे एमएसएमई की अगली विकास यात्रा भारत खेड़ा

इनोवेशन, डिजिटलीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तय करेंगे एमएसएमई की अगली विकास यात्रा भारत खेड़ा
भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण ऐसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के निर्माण पर निर्भर करेगा, जो उत्पादक, नवाचार आधारित, तकनीक-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। यह बात एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई (सीआईआई) एमएसएमई राइज समिट के उद्घाटन अवसर पर कही।

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण ऐसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के निर्माण पर निर्भर करेगा, जो उत्पादक, नवाचार आधारित, तकनीक-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। यह बात एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई (सीआईआई) एमएसएमई राइज समिट के उद्घाटन अवसर पर कही।

उन्होंने कहा कि देश के एमएसएमई क्षेत्र का योगदान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग एक-तिहाई, कुल निर्यात में करीब आधा और रोजगार सृजन में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा है। ऐसे में 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत खेड़ा ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान और तेजी से बदलती तकनीकें जहां नई चुनौतियां लेकर आई हैं, वहीं भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं। उन्होंने एमएसएमई इकाइयों से डिजिटलीकरण, इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नवाचार को अपनाकर अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा तैयार किए गए अनुकूल कारोबारी माहौल का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। पिछले तीन वर्षों में उद्यम पंजीकरण की संख्या पांच गुना बढ़कर 8.8 करोड़ से अधिक हो गई है। वहीं एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाला संस्थागत ऋण वर्ष 2014 के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 37 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसके अलावा क्रेडिट गारंटी योजना के तहत लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के ऋण को गारंटी उपलब्ध कराई गई है।

उन्होंने बताया कि सरकार के 53 टेक्नोलॉजी सेंटर, एमएसएमई चैंपियंस प्रोग्राम, एमएसएमई, आत्मनिर्भर भारत फंड, डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक खरीद (पब्लिक प्रोक्योरमेंट) जैसी पहलें एमएसएमई को विस्तार देने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रही हैं।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने कहा कि सीआईआई जैसे मंच सरकार को जमीनी स्तर की प्रतिक्रियाएं उपलब्ध कराते हैं, जिससे नीतियों को और बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने एमएसएमई उद्यमियों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने पारदर्शिता, कर अनुपालन और जिम्मेदार कारोबारी व्यवहार पर भी जोर दिया।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मिहिर कुमार ने कहा कि जीईएम ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सभी के लिए समान अवसर वाला बनाया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीईएम के माध्यम से होने वाली लगभग 45 प्रतिशत सरकारी खरीद एमएसएमई क्षेत्र से की जा रही है, जो सरकार के निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक है। उन्होंने एमएसएमई इकाइयों से डिजिटल क्षमताएं मजबूत करने और जीईएम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने की अपील की।

सिडबी के उप प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार ने कहा कि एमएसएमई के भविष्य की वृद्धि में औपचारिककरण, डिजिटलीकरण, गुणवत्ता सुधार और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने हरित वित्त (ग्रीन फाइनेंस), डिजिटल लेंडिंग, क्षमता निर्माण और एआई, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता तथा निर्यात क्षमता में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्कर्ष गोस्वामी ने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एमएसएमई के लिए डिजिटल बाजार तक पहुंच आसान बना रहा है। उन्होंने कहा कि ओएनडीसी, आधार और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमों के लिए बाजार में प्रवेश की लागत कम कर रहे हैं और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहे हैं।

सीआईआई राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के अध्यक्ष एवं राजरतन ग्लोबल वायर लिमिटेड के सीएमडी सुनील चोरड़िया ने कहा कि भारतीय एमएसएमई की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पांच प्रमुख स्तंभों- नीतिगत सुधार, वित्त और जोखिम प्रबंधन, उत्पादकता एवं वैश्विक बाजार तक पहुंच, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और क्षमता निर्माण पर आधारित होगी।

वहीं सीआईआई राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के सस्टेनेबिलिटी एवं सीबीएएम रेडीनेस के अध्यक्ष तथा सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के सीएमडी श्रीकांत सोमानी ने कहा कि अब भारतीय एमएसएमई को केवल अस्तित्व बनाए रखने से आगे बढ़कर प्रतिस्पर्धी, मजबूत और टिकाऊ उद्यम बनने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने औद्योगिक क्लस्टरों को मजबूत करने, ओईएम और एमएसएमई के बीच बेहतर साझेदारी, केंद्र और राज्यों में नीतियों के समन्वित क्रियान्वयन तथा साझा बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया।

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Created On :   30 Jun 2026 6:33 PM IST

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