झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले फिर 'होटल पॉलिटिक्स', नाथवानी के आने से मुकाबला हुआ त्रिकोणीय

झारखंड  राज्यसभा चुनाव से पहले फिर होटल पॉलिटिक्स, नाथवानी के आने से मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले एक बार फिर 'होटल पॉलिटिक्स' राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय है।

रांची, 17 जून (आईएएनएस)। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले एक बार फिर 'होटल पॉलिटिक्स' राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय है।

चुनाव में क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं को देखते हुए राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए होटल पॉलिटिक्स का पुराना तरीका आजमा रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के विधायक रांची के एक होटल में ठहरे हुए हैं। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायक मंगलवार को वहां पहुंच चुके हैं। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी यहीं डेरा डाले हुए हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस ने भी रांची के एक होटल में अपने विधायकों और नेताओं की बैठक की है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के विधायक बुधवार को एक साथ रहेंगे और गुरुवार को सामूहिक रूप से मतदान के लिए विधानसभा जाएंगे।

दरअसल, झारखंड की राजनीति में यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। राज्य गठन के बाद जब-जब सत्ता का संतुलन नाजुक हुआ है या किसी अहम चुनाव और विश्वास मत में संख्या बल निर्णायक साबित हुआ है, तब-तब विधायकों को एक साथ रखने के लिए होटल और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की कवायद सामने आती रही है।

झारखंड में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की पहली बड़ी चर्चा साल 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनने पर भाजपा और सहयोगी दलों ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजा था। उस दौर में कुछ विधायक जयपुर और ओडिशा के होटलों एवं रिसॉर्ट्स में ठहराए गए थे। इसके बाद अगस्त 2022 में तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार पर राजनीतिक संकट के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर भेजा गया था। गठबंधन ने तब विपक्ष पर अपने विधायकों में सेंध लगाने की आशंका जताई थी। लगभग एक सप्ताह तक विधायक वहां रहे और बाद में रांची लौटे।

फरवरी 2024 में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और चम्पई सोरेन के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के समय भी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के विधायकों को हैदराबाद भेजा गया था। फ्लोर टेस्ट से पहले तक वे वहीं रहे और बाद में मतदान के लिए वापस लौटे। मौजूदा राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 56 वोट चाहिए और इंडिया ब्लॉक के पास लगभग इतनी ही संख्या मौजूद है।

दूसरी ओर, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी सभी 81 विधायकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि साल 2008 और 2014 में भी वह झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे और उन्हें विभिन्न दलों का समर्थन मिला था। इस बार भी उन्हें अंतरात्मा की आवाज के आधार पर समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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Created On :   17 Jun 2026 12:57 PM IST

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