जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार को तो भाजपा ने कांग्रेस को घेरा

जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार को तो भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं दीं। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने कांग्रेस और विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं दीं। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने कांग्रेस और विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

राजद के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि क्या अब देश में आंदोलन होगा या नहीं, राजनीति होगी या नहीं, यह भी सरकार ही तय करेगी। उन्होंने सवाल किया कि लाखों छात्र अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचते हैं तो सरकार उनसे संवाद करने के बजाय बल प्रयोग क्यों करती है। छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन सरकार ने न तो माफी मांगी और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया। सरकार अब तक पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी है। कई बार पेपर लीक होने और सीबीआई जांच दर्ज होने के बावजूद किसी आरोपी को सजा नहीं मिली।

सुधाकर सिंह ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि देश के आम परिवारों के बच्चे हैं और सरकार को उनसे बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। विपक्ष को संसद में बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा और नागरिकों पर बल प्रयोग किया जा रहा है, जो आपातकाल जैसी स्थिति की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि नीट मामले के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी। साथ ही उन्होंने पेपर लीक गिरोहों को लेकर केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए।

कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा कि पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ, कई की आयु सीमा समाप्त हो गई और बार-बार परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ रही हैं। ऐसे मुद्दों को उठाना राजनीति नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य का सवाल है। राहुल गांधी पिछले दो वर्षों से लगातार इन मुद्दों को उठाते रहे हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है, बैरिकेडिंग कर उनकी आवाज दबाई जा रही है और जब विपक्ष संसद में यह मुद्दा उठाता है तो माइक बंद कर दिए जाते हैं।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि जब आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहा है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा क्यों दे रहे हैं। यह सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय अलग-अलग मंत्रियों से जवाब दिलवाती है, जबकि प्रधानमंत्री चुप रहते हैं। छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और विपक्ष से चुप रहने की अपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने एनटीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था बनाया जाना चाहिए था, लेकिन इसे सोसाइटी के रूप में संचालित किया जा रहा है।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार वर्ष 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई थी, जिसे संसद ने पारित भी किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इस कानून पर कोई सुझाव नहीं दिया और अब वही लोग इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।

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Created On :   23 July 2026 12:04 AM IST

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