कब से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र? जानिए कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त

कब से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र? जानिए कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है। मां दुर्गा की आराधना का यह पावन पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है। मां दुर्गा की आराधना का यह पावन पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

इस साल शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 रविवार से हो रही है। इसी दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना यानी घट स्थापना की जाएगी। मान्यता है कि विधि-विधान से कलश स्थापना करने के बाद ही मां शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा का दौर शुरू होता है।

पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के आधार पर मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे में अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।

कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसके बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा और पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है। छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि और अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना का विधान है।

इस बार नवरात्र के दौरान 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी के विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इस दिन कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा का आयोजन भी कई घरों में किया जाता है। इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा।

नवरात्र के इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा के साथ व्रत और उपवास भी रखते हैं। घर में अखंड ज्योति जलाना, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और मां को श्रद्धापूर्वक भोग लगाना भी कई परिवारों की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Created On :   7 Oct 2026 9:44 AM IST

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