केजरीवाल के कार्यकाल में सरकार को भारी जीएसटी नुकसान, रिश्वत-वसूली के लिए नहीं की गई कार्रवाई प्रवेश वर्मा

केजरीवाल के कार्यकाल में सरकार को भारी जीएसटी नुकसान, रिश्वत-वसूली के लिए नहीं की गई कार्रवाई प्रवेश वर्मा
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कैग रिपोर्ट का मुद्दा उठाते हुए पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 24वीं कैग रिपोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है।

नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कैग रिपोर्ट का मुद्दा उठाते हुए पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 24वीं कैग रिपोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है।

मंत्री प्रवेश वर्मा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "विधानसभा के मानसून सत्र में 24वीं कैग रिपोर्ट को पेश किया गया। कैग रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है। हम सभी जानते हैं कि केजरीवाल सरकार में कामों का ऑडिट नहीं होता था। भाजपा सरकार बनने के बाद डेढ़ साल में 24 कैग रिपोर्ट आ चुकी हैं। हर रिपोर्ट में सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया है।"

उन्होंने दावा किया कि 24वीं कैग रिपोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2023 की है।"

प्रवेश वर्मा ने कहा कि हर वित्त वर्ष में केजरीवाल सरकार ने क्या-क्या भ्रष्टाचार किए, इन सबके बारे में कैग रिपोर्ट के दस्तावेजों से जानकारी सामने आई है। कैग ने सबसे अहम बात यह कही कि 70,410 करोड़ रुपए का जीएसटी दिल्ली की जनता का बकाया था।

मंत्री ने कहा, "65 प्रतिशत राशि 5 साल से अधिक समय से दिल्ली सरकार वसूल नहीं करती थी। जिन उद्योगपतियों को पैसा देना होता था, उससे जीएसटी विभाग सांठगांठ करता था और उद्योगपतियों का बकाया सालों तक लंबित रहता था। बहुत सारे कारोबारी ऐसे थे, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो चुका था। इसके बावजूद ईवे बिल बनाया जाता था। 8,334 करदाताओं का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था, वे ईवे बिल जनरेट करते रहे। 68,680 करोड़ रुपए के ईवे बिल जनरेट किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि सरकार को बहुत भारी जीएसटी नुकसान हुआ है।"

प्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि 4,076 लोग टैक्स फाइल नहीं करते थे, लेकिन उन्होंने भी 11,635 करोड़ रुपए के ईवे बिल जनरेट किए। उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल, उनकी सरकार के जीएसटी विभाग और उनके मंत्रियों को यह सब पता था, लेकिन वे इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते थे। कार्रवाई इसलिए नहीं की गई, ताकि रिश्वत ली जाए और डरा-धमकाकर वसूली की जाए।

उन्होंने कहा कि टैक्स चोरी हो रहा था। इसके ऊपर पिछली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। 6.10 करोड़ ईवे बिल जनरेट हुए, जिसमें सिर्फ 70 मामलों यानी महज लगभग 0.10 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई हुई। इसलिए यह बहुत गंभीर विषय है। सरकार के पास पूरे आंकड़े थे, फिर भी सिर्फ 70 मामलों में कार्रवाई हुई।

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Created On :   9 Aug 2026 11:10 AM IST

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