बड़े सिंगर्स को सुनने के बाद ही शास्त्रीय गीत गाते थे किशोर कुमार, फिर देते थे अपना बेहतरीन वर्जन

बड़े सिंगर्स को सुनने के बाद ही शास्त्रीय गीत गाते थे किशोर कुमार, फिर देते थे अपना बेहतरीन वर्जन
भारतीय सिनेमा में किशोर कुमार एक ऐसा नाम है, जिनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसती है। उनकी संगीत यात्रा कई उतार-चढ़ाव से भरी रही, लेकिन अपनी अनोखी आवाज और अलग अंदाज के दम पर उन्होंने खास पहचान बनाई।

मुंबई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा में किशोर कुमार एक ऐसा नाम है, जिनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसती है। उनकी संगीत यात्रा कई उतार-चढ़ाव से भरी रही, लेकिन अपनी अनोखी आवाज और अलग अंदाज के दम पर उन्होंने खास पहचान बनाई।

किशोर कुमार एक ऐसे गायक थे, जिन्होंने कभी भी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा नहीं ली थी। उसके बावजूद ⁠अपनी गायिकी से लोगों का दिल जीता। बताया जाता है कि जब भी किशोर कुमार से शास्त्रीय संगीत गाने के लिए कहा जाता था, तो वह शास्त्रीय संगीत में कुशल अन्य समकालीन गायकों के वर्जन को सुनते थे और फिर खुद गाना गाते थे।

फिल्म 'महबूब' का गाना 'नैना सावन भादौ' को किशोर कुमार ने गाया है। इसके संगीतकार आर⁠ डी⁠ बर्मन और गीतकार आनंद बख्शी थे। बताया जाता है कि जब आर.⁠डी. बर्मन पहली बार यह गाना लेकर किशोर कुमार के पास गए, तो किशोर दा इसे गाने में हिचक रहे थे क्योंकि उन्हें शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं मिली थी। उन्होंने पहले लता मंगेशकर का गाया हुआ वर्जन सुनने की इच्छा जताई।

लता द्वारा गाया ⁠वर्जन एक सप्ताह तक बार-बार सुनने और उसकी बारीकियों को समझने के बाद उन्होंने अपना वर्जन रिकॉर्ड किया, जिसे आज कई लोग इस गाने का सबसे बेहतरीन वर्जन मानते हैं। शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग न होने के बावजूद किशोर कुमार ने इस गाने के दर्द और जज्बात को बहुत गहराई से गाया। आज भी यह गाना लोग सुनते रहते हैं।

भले ही किशोर कुमार ने कभी पारंपरिक तरीके से शास्त्रीय संगीत नहीं सीखा था, लेकिन संगीत को लेकर उनकी समझ इतनी तेज थी कि बड़े-बड़े प्रशिक्षित संगीतकार भी हैरान रह जाते थे। किशोर किसी भी धुन को सुनते ही उसके भाव को तुरंत पकड़ लेते थे। न कोई क्लास, न कोई औपचारिक ट्रेनिंग, बस संगीत के साथ एक सच्चा, गहरा जुड़ाव और यही बात उन्हें सबसे अलग बनाती थी।

उनकी गायकी किताबी तौर पर भले ही परफेक्ट न हो, लेकिन उसमें जान थी। वह सिर्फ राग का गायन नहीं करते थे, बल्कि उसे जीते थे। इसी अंदाज ने उन्हें शास्त्रीय संगीत को आम गीतों में पिरोने में मदद की। उनके गाने इस बात का सबूत हैं कि जज्बात तकनीक से ज्यादा मायने रखते हैं।

किशोर कुमार के गीत आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं। वह अपने पीछे एक समृद्ध संगीत विरासत छोड़ गए हैं।

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Created On :   13 Oct 2026 12:28 PM IST

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