मध्य प्रदेश सोलर पंप योजना से बुंदेलखंड के किसानों को राहत, सिंचाई आसान और आय में बढ़ोतरी

मध्य प्रदेश  सोलर पंप योजना से बुंदेलखंड के किसानों को राहत, सिंचाई आसान और आय में बढ़ोतरी
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में खेती के लिए समय पर सिंचाई करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री सोलर पंप हाउस योजना किसानों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर उभरी है।

दमोह, 6 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में खेती के लिए समय पर सिंचाई करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री सोलर पंप हाउस योजना किसानों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर उभरी है।

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के छोटे से गांव बितली के किसान पंचम सिंह लोधी और मुन्ना यादव आज आत्मनिर्भर खेती का मजबूत उदाहरण बन चुके हैं। कभी बिजली की अनियमित आपूर्ति और डीजल पंप के बढ़ते खर्च से परेशान रहने वाले पंचम सिंह के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं रही।

आईएएनएस से बातचीत में पंचम सिंह ने बताया कि सीमित जमीन और सिंचाई पर निर्भर खेती के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिजली कटौती इतनी अधिक थी कि उन्हें कई बार रात के दो बजे उठकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती थी। अगर समय पर नहीं उठ पाते तो बिजली चली जाती और फसलें सूखने लगती थीं। इसके अलावा डीजल पंप का खर्च भी लगातार बढ़ रहा था, जिससे खेती करना घाटे का सौदा बनता जा रहा था।

उन्होंने कहा कि स्थिति तब बदली जब उन्हें प्रधानमंत्री सोलर पंप हाउस योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत आवेदन किया और योजना के तहत उन्हें करीब 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप मिल गया। इस पंप को लगवाने में उन्हें केवल 10 प्रतिशत, यानी लगभग 20 से 30 हजार रुपए खर्च करने पड़े। इसके बाद उनकी खेती में बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब उनके खेतों में दिनभर मुफ्त और निर्बाध सिंचाई संभव हो गई है, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ी है और लागत में भारी कमी आई है।

सोलर पंप लगने के बाद पंचम सिंह की आय में भी सुधार हुआ है। डीजल और बिजली का खर्च लगभग समाप्त हो गया है और समय पर सिंचाई होने से फसलों की पैदावार में वृद्धि की उम्मीद है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और खेती अब पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई है।

इसी गांव के एक अन्य किसान मुन्ना यादव ने भी इस योजना के फायदे गिनाते हुए बताया कि पहले उन्हें हर महीने करीब 10 हजार रुपए तक बिजली बिल देना पड़ता था, लेकिन अब सोलर पंप की मदद से यह खर्च पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि वे न केवल खुद लाभान्वित हुए हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी इस योजना के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

सोलर पंप जैसी योजनाएं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समय पर मिली इस तरह की सरकारी सहायता से न केवल खेती को आसान बनाया जा सकता है, बल्कि इसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।

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Created On :   6 May 2026 11:08 PM IST

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