महाराष्ट्र सूखा राहत के लिए श्रीसाईं बाबा संस्थान की बड़ी पहल, सीएम निधि में 5 करोड़ रुपए दिए

महाराष्ट्र सूखा राहत के लिए श्रीसाईं बाबा संस्थान की बड़ी पहल, सीएम निधि में 5 करोड़ रुपए दिए
महाराष्ट्र में सूखा राहत कार्यों के लिए श्रीसाईं बाबा संस्थान, शिर्डी ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। संस्थान की ओर से यह राशि राज्य में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को समर्थन देने के उद्देश्य से दी गई है।

मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में सूखा राहत कार्यों के लिए श्रीसाईं बाबा संस्थान, शिर्डी ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। संस्थान की ओर से यह राशि राज्य में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को समर्थन देने के उद्देश्य से दी गई है।

श्रीसाईं बाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गोरक्ष गाडिलकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 5 करोड़ रुपए का चेक सौंपा। इस अवसर पर राज्य के जल संसाधन मंत्री एवं अहिल्यानगर जिले के पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल तथा जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन भी उपस्थित रहे।

संस्थान की ओर से कहा गया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति को देखते हुए राहत उपायों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए यह योगदान दिया गया है। मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से यह राशि सूखा प्रभावित किसानों और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक राहत कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी।

श्रीसाईं बाबा संस्थान श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं सामाजिक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। संस्थान ने कहा कि सूखा राहत के लिए दी गई 5 करोड़ रुपए की यह सहायता उसकी सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवाभावी परंपरा का हिस्सा है।

महाराष्ट्र में सूखे की चुनौती के बीच साईं संस्थान की यह पहल राहत कार्यों को गति देने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है।

इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के करीब 1.5 करोड़ सूखा प्रभावित किसानों को 5,000 रुपए की अग्रिम वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सहायता राशि इसी सप्ताह किसानों के बैंक खातों में जमा कराई जाए।

इस योजना पर कुल 7,500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।

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