मनीला में एआरएफ बैठक भारत ने भू-राजनीतिक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद पर दिया जोर

मनीला में एआरएफ बैठक भारत ने भू-राजनीतिक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद पर दिया जोर
विदेश मंत्रालय के पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने नौ जून को मनीला में आयोजित आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था और साझा वैश्विक हितों की रक्षा पर जोर दिया।

नई द‍िल्‍ली, 10 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय के पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने नौ जून को मनीला में आयोजित आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था और साझा वैश्विक हितों की रक्षा पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय (पूर्व) के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने नौ जून को मनीला में आयोजित आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने मौजूदा समय की भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में एआरएफ की भूमिका को बहुत अहम बताया और बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।

बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई और इस बात पर सहमति बनी कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'ग्लोबल कॉमन्स' (साझा वैश्विक हितों) को सुरक्षित रखने के लिए नियमों पर आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है।

पूर्व भारतीय राजनयिक रघु गुरुराज ने 'इंडियन नैरेटिव' में लिखा क‍ि भारत का जुड़ाव तेजी से 'आसियान' की उस पसंद के अनुरूप हो रहा है, जिसमें सभी को साथ लेकर चलने वाले (इनक्लूसिव) और किसी खास गुट से न बंधे क्षेत्रीय ढांचे को प्राथमिकता दी जाती है।

भारत ने हमेशा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'आसियान' की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया है, जो कि गठबंधन-आधारित दृष्टिकोण से अलग है। साथ ही, भारत ईस्ट एशिया समिट, 'आसियान' रीजनल फोरम और 'आसियान' डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस में भी सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।

गुरुराज ने कहा क‍ि 'आसियान' की रणनीतिक सोच में सख्त भू-राजनीतिक गुटों के बजाय संतुलन, आपसी बातचीत और कई देशों के साथ तालमेल बिठाने को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए, भारत का अपेक्षाकृत लचीला और किसी पर कुछ थोपने से बचने वाला दृष्टिकोण उसे दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ जुड़ने का मौका देता है। भारत का रवैया उन दुविधाओं के होने की आशंका को भी समाप्त कर देता है, जो अक्सर बड़ी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा से जुड़ी होती हैं।

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Created On :   10 Jun 2026 2:44 PM IST

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