विज्ञान/प्रौद्योगिकी: प्राइमरी मार्केट में जमकर निवेश कर रहे एफआईआई, अगस्त में की 40,305 करोड़ रुपए की खरीदारी

प्राइमरी मार्केट में जमकर निवेश कर रहे एफआईआई, अगस्त में की 40,305 करोड़ रुपए की खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) स्टॉक एक्सचेंज (सेकेंडरी मार्केट) में एक तरफ बिकवाली कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट (आईपीओ, एफपीओ आदि) के जरिए इक्विटी में निवेश कर रहे हैं।

मुंबई, 31 अगस्त (आईएएनएस)। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) स्टॉक एक्सचेंज (सेकेंडरी मार्केट) में एक तरफ बिकवाली कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट (आईपीओ, एफपीओ आदि) के जरिए इक्विटी में निवेश कर रहे हैं।

एनालिस्ट्स ने रविवार को कहा कि एफआईआई ने अगस्त में 40,305 करोड़ रुपए का निवेश प्राइमरी मार्केट में किया है। टैरिफ नीतियों और एक्सचेंज रेट में अचानक बदलाव भी एफआईआई के व्यवहार पर असर डाल रहे हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में इन कारकों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

अगस्त में एफआईआई ने अपनी बिकवाली जारी रखी और एक्सचेंजों के माध्यम से कुल 39,063 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची।

अगस्त में हुई इस बिकवाली के साथ, 2025 में अब तक एफआईआई की कुल बिकवाली 170,940 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

यह सिलसिला पिछले साल भी जारी था। 2024 में एफआईआई द्वारा 1,21,210 करोड़ रुपए की कुल बिकवाली की गई थी।

विजयकुमार के अनुसार, एफआईआई द्वारा की गई इस भारी बिकवाली का सीधा कारण यह है कि अन्य बाजारों की तुलना में भारत में मूल्यांकन अपेक्षाकृत अधिक है। एफआईआई सस्ते बाजारों में पैसा लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "यह ध्यान रखना जरूरी है कि एफआईआई लंबे समय से प्राथमिक बाजार में लगातार खरीदार बने हुए हैं।"

हालांकि, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के 2027 तक 4,26,45,000 करोड़ रुपए (5 ट्रिलियन डॉलर) के सकल घरेलू उत्पाद तक पहुंचने का अनुमान है और 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। 2030 तक, भारत 7.3 ट्रिलियन डॉलर के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार तेज बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर पहुंच गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में यह वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत थी।

अगले महीने की शुरुआत में कई उच्च-आवृत्ति संकेतक जारी होने वाले हैं।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजीत मिश्रा ने कहा कि आने वाले हफ्ते में निवेशक एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और कम्पोजिट पीएमआई के साथ-साथ ऑटो बिक्री के आंकड़ों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, जीएसटी परिषद की बैठक पर भी ध्यान केंद्रित रहेगा।

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Created On :   31 Aug 2025 11:06 AM IST

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