नैनीताल में सर्दियों के पर्यटन सीजन की तैयारी तेज, नैनी झील में नावों की मरम्मत शुरू नरेंद्र सिंह चौहान

नैनीताल में सर्दियों के पर्यटन सीजन की तैयारी तेज, नैनी झील में नावों की मरम्मत शुरू नरेंद्र सिंह चौहान
सरोवर नगरी नैनीताल में बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद पर्यटन गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अक्टूबर से पर्यटकों की आमद बढ़ने के साथ ही नैनी झील में नौकायान कराने वाली नावों को भी नए पर्यटन सीजन के लिए तैयार किया जा रहा है। नाव चालक इन दिनों नावों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और मरम्मत में जुटे हैं, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित नौकायान का आनंद मिल सके।

नैनीताल, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरोवर नगरी नैनीताल में बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद पर्यटन गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अक्टूबर से पर्यटकों की आमद बढ़ने के साथ ही नैनी झील में नौकायान कराने वाली नावों को भी नए पर्यटन सीजन के लिए तैयार किया जा रहा है। नाव चालक इन दिनों नावों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और मरम्मत में जुटे हैं, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित नौकायान का आनंद मिल सके।

बरसात के दौरान नैनी झील में नौकायन का कारोबार अपेक्षाकृत कम रहता है। बारिश के कारण नावों की लकड़ी खराब होने और उनमें दरारें आने की आशंका भी रहती है। ऐसे में बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद नावों को झील से बाहर निकालकर उनकी मरम्मत और देखरेख की जाती है।

नाव चालक समिति के महासचिव नरेंद्र सिंह चौहान ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि बरसात के दौरान करीब तीन महीने तक नौकायन का काम प्रभावित रहता है। इस दौरान कुछ नावें चलती हैं, लेकिन अधिकांश नावों की देखरेख की जरूरत होती है। अक्टूबर में नया पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही नावों को झील से बाहर निकालकर तैयार किया जाता है।

उन्होंने बताया कि सबसे पहले नावों में जमा गंदगी और सिल्ट को साफ किया जाता है। इसके बाद लकड़ी की जांच की जाती है और जहां जरूरत होती है, वहां खराब लकड़ी को बदलकर मरम्मत की जाती है। नावों में आई दरारों को भरने के लिए पोटीन तैयार की जाती है। इसमें अलसी का तेल मिलाकर दरारों को भरा जाता है। इसके बाद नावों पर वार्निश किया जाता है और उन्हें धूप में सुखाया जाता है।

चौहान ने बताया कि मरम्मत के बाद नावों को तीन से चार दिन तक सूखने दिया जाता है। पूरी तरह सूखने और जांच के बाद ही उन्हें दोबारा झील में उतारा जाता है। इसका उद्देश्य पर्यटकों की सुरक्षा के साथ नावों को भी लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनाए रखना है।

नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि नैनी झील में इस्तेमाल होने वाली नावों का निर्माण काफी खर्चीला है। एक नई नाव बनाने में करीब 2.25 लाख रुपए तक का खर्च आता है। नावों के निर्माण में लगभग आठ किलो तांबे की कीलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें दिल्ली से मंगवाया जाता है। तांबे की कीमत करीब तीन हजार रुपए प्रति किलो होने के कारण नाव बनाने की लागत बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया कि नाव के आकार और निर्माण में लगने वाली सामग्री के अनुसार खर्च में अंतर हो सकता है। पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले नावों की मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी करना जरूरी है, ताकि नैनी झील में आने वाले पर्यटक सुरक्षित तरीके से नौकायान का आनंद ले सकें।

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