राजनीति: अपशब्दों का इस्तेमाल कांग्रेस नहीं, भाजपा की संस्कृति तारिक अनवर

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की संस्कृति और संस्कार में गाली-गलौज की कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के किसी नेता ने गाली नहीं दी है। यह कहा जा रहा है कि किसी कार्यकर्ता ने मंच पर चढ़कर कुछ अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। हम लोग उसकी निंदा करते हैं क्योंकि कांग्रेस की जो संस्कृति और संस्कार है, उसमें गाली-गलौज की गुंजाइश ही नहीं है। हम इस तरह की भाषा की कड़ी निंदा करते हैं। यह भाजपा का कल्चर है। खुद प्रधानमंत्री ने सोनिया गांधी के लिए ‘जर्सी गाय’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, कांग्रेस को ‘विधवा’ कहा और यह भी दावा किया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो लोगों के मंगलसूत्र छीन लेगी। एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी भाषा का इस्तेमाल करे, तो कार्यकर्ताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस घटना को भाजपा की साजिश करार दिए जाने पर तारिक अनवर ने सहमति जताते हुए कहा, “भाजपा और आरएसएस साजिश रचने में माहिर हैं। वोटर अधिकार यात्रा को बदनाम करने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। पूरी यात्रा को बदनाम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस कुछ भी कर सकते हैं। आरएसएस तो इसमें माहिर है। इस यात्रा को ऐतिहासिक जनसमर्थन मिलने से भाजपा में घबराहट है।"
इस बीच, सदाकत आश्रम के बाहर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आश्रम में घुसकर तोड़फोड़ की, जिसे अनवर ने भाजपा की हताशा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “वोट अधिकार यात्रा को मिल रहे अपार जनसमर्थन से भाजपा, एनडीए, अमित शाह और प्रधानमंत्री सब घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि अगर यही स्थिति रही तो आगामी चुनाव में उनकी जीत नामुमकिन है।”
उन्होंने आगे कहा, “घुसपैठियों को रोकने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं, गृह मंत्रालय की है। अमित शाह को यह जवाब देना होगा कि इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिए देश में कैसे घुसे?”
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ओर से 75 साल की उम्र सीमा को खारिज किये जाने पर तारिक अनवर ने तंज कसते हुए कहा, “यह दर्शाता है कि भाजपा और आरएसएस सत्ता से चिपके रहना चाहते हैं। पहले कहते थे कि 75 साल में संन्यास लेना चाहिए, अब उनकी भाषा बदल गई है। यह उनकी सत्ता की लालसा को दर्शाता है।
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Created On :   29 Aug 2025 9:05 PM IST