राजनीति: बाजपट्टी विधानसभा राजद ने रोका था जदयू का विजय रथ, इस बार यूं बदल सकते हैं समीकरण

बाजपट्टी विधानसभा राजद ने रोका था जदयू का विजय रथ, इस बार यूं बदल सकते हैं समीकरण
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पहला चुनाव 2010 में हुआ। 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार ने जीत हासिल की।

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस) बिहार के सीतामढ़ी जिले की बाजपट्टी विधानसभा सीट अपने जटिल सामाजिक-जातीय समीकरणों और सियासी उतार-चढ़ाव के लिए जानी जाती है। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पहला चुनाव 2010 में हुआ। 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार ने जीत हासिल की।

खास बात यह है कि 2010 में जदयू ने एनडीए में शामिल होकर, वहीं 2015 में एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने एक बार फिर एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। उम्मीद जताई जा रही थी कि जदयू तीसरी बार यहां पर जीत हासिल करेगी, लेकिन कुछ वोटों के अंतर से यह सीट उसके हाथों से निकल गई। राजद उम्मीदवार मुकेश यादव ने जदयू उम्मीदवार रंजू गीता को मात्र 2704 वोट से हरा दिया।

अब आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल तैयार है। राजद जहां पिछली जीत को बरकरार रखना चाहेगी, वहीं, जदयू इस सीट को हर हाल में वापसी चाहेगी।

बाजपट्टी विधानसभा सीट बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक है, जो अपने सामाजिक-जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के कारण हमेशा चर्चा में रहती है। बाढ़, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे मुद्दे यहां के मतदाताओं के लिए अहम हैं, जबकि यादव, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं का गठजोड़ इस क्षेत्र की सियासत को दिशा देता है।

इस विधानसभा का क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है, जहां की जनता की जीविका मुख्य रूप से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे व्यापार, मजदूरी, और पशुपालन भी आजीविका के प्रमुख स्रोत हैं।

हालांकि, इस क्षेत्र की जनता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो उनकी आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बाधा डालती हैं। बाजपट्टी के बाजारों में छोटी दुकानें, किराना स्टोर और अन्य स्थानीय व्यापार भी कुछ लोगों की जीविका का आधार हैं। इसके अलावा हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योग (जैसे मिट्टी के बर्तन बनाना) सीमित स्तर पर मौजूद हैं।

यहां के लोगों को हर साल मानसून के दौरान बाढ़ से फसलों, घरों, और आजीविका को भारी नुकसान होता है। तटबंधों की खराब स्थिति और बाढ़ प्रबंधन की कमी इस समस्या को और गंभीर बनाती है। बाढ़ के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है।

इस विधानसभा में कुल जनसंख्या 563531 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 295455 और महिलाओं की संख्या 268076 है। चुनाव आयोग द्वारा जारी एक जनवरी 2024 के डाटा के अनुसार, इस विधानसभा में कुल मतदाता 337812 हैं । इनमें से पुरुष मतदाता 178701, महिला वोटर 159105, जबकि थर्ड जेंडर के 6 मतदाता हैं।

इस सीट पर पिछले चुनाव में मुस्लिम-यादव समीकरण ने राजद के पक्ष में काम किया। जदयू की डॉ. रंजू गीता ने इस सीट पर 2010 और 2015 में जीत हासिल की थी, लेकिन 2020 के चुनाव में लोजपा (रामविलास) के अलग चुनाव लड़ने का खामियाजा जदयू को उठाना पड़ा।

इस विधानसभा सीट पर इस बार फिर से एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। एनडीए में शामिल जदयू के लिए एक अच्छी बात यह है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे, जबकि महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल एकजुट हैं। इसके अलावा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, जिससे बाजपट्टी में त्रिकोणीय मुकाबला होने की पूरी उम्मीद है।

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Created On :   31 Aug 2025 11:21 AM IST

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