एनएसई ने फिन निफ्टी की क्वांटिटी फ्रीज लिमिट घटाकर 1,200 कॉन्ट्रैक्ट की, नई लिमिट 1 दिसंबर से होगी लागू

एनएसई ने फिन निफ्टी की क्वांटिटी फ्रीज लिमिट घटाकर 1,200 कॉन्ट्रैक्ट की, नई लिमिट 1 दिसंबर से होगी लागू
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने फिन निफ्टी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए क्वांटिटी फ्रीज लिमिट को रिवाइज कर दिया है। नई लिमिट अगले महीने 1 दिसंबर से लागू हो जाएगी।

मुंबई, 29 नवंबर (आईएएनएस)। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने फिन निफ्टी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए क्वांटिटी फ्रीज लिमिट को रिवाइज कर दिया है। नई लिमिट अगले महीने 1 दिसंबर से लागू हो जाएगी।

फिन निफ्टी के लिए फ्रीज लिमिट को 1800 के पिछले लेवल से कम कर 1200 कॉन्ट्रैक्ट्स कर दिया गया है।

एक्सचेंज ने शुक्रवार को जारी एक सर्कुलर में घोषणा की कि यह संशोधन एक्सचेंज की इस वर्ष 30 अप्रैल के सर्कुलर में एफएंडओ कंसोलिडेटेड सर्कुलर में निर्धारित गणना पद्धति पर आधारित है।

अपडेटेड फ्रेमवर्क के तहत, बैंक निफ्टी के लिए अधिकतम ऑर्डर साइज 600 कॉन्ट्रैक्ट्स तय किया गया है, जो कि निफ्टी के लिए 1800, फिन निफ्टी के लिए 1200, मिडकैप निफ्टी के लिए 2800 और निफ्टी नेक्स्ट 50 के लिए 600 कॉन्ट्रैक्ट्स है।

यह लिमिट किसी ट्रेडर के लिए सिंगल ऑर्डर में प्लेस की जाने वाली कॉन्ट्रैक्स्ट की अधिकतम संख्या को दर्शाती है।

क्वांटिटी फ्रीज लिमिट मार्केट स्थिरता बनाए रखने के लिए एक्सचेंज की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाला एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। यह गलत या असामान्य रूप से बड़े ऑर्डर को रोकने के लिए डिजाइन किए गए हैं ताकि अचानक अस्थिरता की स्थिति पैदा न हो।

एक्सचेंज की ओर से डेरिवेटिव सेगमेंट में स्मूद ट्रेडिंग सुनिश्चित करने के लिए और फैट फिंगर एरर के जोखिम को कम करने के लिए सिंगल ऑर्डर के साइज को कैप किया जाता है। अगर कोई ट्रेडर परमिटेड लिमिट से बड़े ऑर्डर के लिए कोशिश भी करता है तो सिस्टम इसे ऑटोमेटिकली रिजेक्ट कर देता है। इस तरह के ऑर्डर केवल तभी एग्जीक्यूट किए जा सकते हैं जब ब्रोकर उन्हें छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर दें, जो निर्धारित सीमा के भीतर हों।

एनएसई की ओर से इन लिमिट को समय-समय पर रिव्यू और रिवाइज किया जाता है ताकि इन्हें मार्केट की कंडीशन और ट्रेडिंग पैटर्न के तहत रखा जा सके।

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में एक्सचेंज ने कहा था कि यूनिक ट्रेडिंग अकाउंट इस महीने 24 करोड़ के आंकड़े को पार कर गए हैं, जो कि बीते वर्ष अक्टूबर में 20 करोड़ के आंकड़े पर थे।

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Created On :   29 Nov 2025 5:05 PM IST

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