पश्चिम बंगाल में मामता बनर्जी की नहीं, लोकतंत्र की हुई है हार संजय राउत

पश्चिम बंगाल में मामता बनर्जी की नहीं, लोकतंत्र की हुई है हार संजय राउत
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार हुई है। इसलिए जो लोग खुशी मना रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं।

मुंबई, 6 मई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार हुई है। इसलिए जो लोग खुशी मना रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बूथों पर गड़बड़ी हुई, मतदाता सूची से नाम हटाए गए और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अनियमितताएं हुईं। राउत ने कहा कि ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का फैसला उनके आंदोलन का हिस्सा है।

संजय राउत ने कहा कि ममता बनर्जी हमेशा गलत के खिलाफ पूरी ताकत से खड़ी होती हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी हार मानने वालों में से नहीं हैं और हर परिस्थिति में जनता के लिए लड़ती रहेंगी। राउत के अनुसार, ममता बनर्जी हमेशा से सड़क से लेकर सत्ता तक आंदोलन की राजनीति करती रही हैं और यह उनका पुराना राजनीतिक अंदाज है।

उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने भी ममता बनर्जी से संपर्क किया है। उनका कहना है कि विपक्ष को अब अपनी लड़ाई और मजबूत करनी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता लगातार विपक्षी एकजुटता पर चर्चा कर रहे हैं। राउत ने साफ कहा कि यह समय संघर्ष को तेज करने का है और विपक्ष इसके लिए तैयार है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक असित मजूमदार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने लक्ष्मी भंडार, युवा साथी और स्वास्थ्य साथी जैसी कई जनकल्याण योजनाएं चलाई हैं, जिससे लाखों लोगों को फायदा मिला है। इसके बावजूद कुछ मतदाताओं ने उनके खिलाफ मतदान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल समाज में धर्म के आधार पर विभाजन की कोशिश कर रहे हैं, जो देश के लिए सही नहीं है। उनका कहना है कि भारत का संविधान सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार देता है और इसे कमजोर करना खतरनाक हो सकता है।

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Created On :   6 May 2026 1:54 PM IST

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