पिता की सीख को आज भी संजोकर रखे हैं सोनू निगम; बोले-पापा ने कहा था, अभी मेहनत करो, बाद में आराम की जिंदगी जीना

पिता की सीख को आज भी संजोकर रखे हैं सोनू निगम; बोले-पापा ने कहा था, अभी मेहनत करो, बाद में आराम की जिंदगी जीना
मशहूर गायक सोनू निगम के गाने बहुत ही सुरीले, भावुक और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। यही कारण है कि आज वे दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं। सोनू निगम ने माना कि एक समय में उन्हें बहुत गुस्सा आया करता था लेकिन एक समय के बाद उन्होंने उसी गुस्से को करियर की दिशा देने के लिए इस्तेमाल किया।

मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। मशहूर गायक सोनू निगम के गाने बहुत ही सुरीले, भावुक और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। यही कारण है कि आज वे दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं। सोनू निगम ने माना कि एक समय में उन्हें बहुत गुस्सा आया करता था लेकिन एक समय के बाद उन्होंने उसी गुस्से को करियर की दिशा देने के लिए इस्तेमाल किया।

गायक ने हाल ही में ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा के होस्ट किए गए 'गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज' में दिखे और बताया कि बचपन में उन्हें गुस्से की दिक्कतों से जूझना पड़ता था। उन्होंने कहा, "मैंने सिडनी ओपेरा हाउस में दोपहर को तीन घंटे का शो और फिर शाम को फिर से तीन घंटे का शो किया। मैं ये कर पाया क्योंकि मेरे अंदर उस समय बहुत आग और गुस्सा था। उस आग में करुणा, मेहनत और दूसरों का ख्याल करना भी था। मुझे लगता है कि उस आग का होना बेहद जरूरी है। जरूरी ये है कि मैं उसे सही तरीके से इस्तेमाल कर रहा हूं। उस समय मैंने उसे अपने ऊपर गुस्से को हावी नहीं होने दिया और न ही उसने मुझे गैर-जिम्मेदार बनाया। सच तो ये है कि बचपन में मेरा गुस्सा बहुत तेज था।"

बातचीत में गायक ने बताया कि वे काफी रोमांटिक भी थे लेकिन महत्वाकांक्षाओं ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने पिता की बात को दोहराते हुए कहा, "मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं, या तो अभी मजे ले लो और बाद में संघर्ष करो या फिर अभी संघर्ष कर लो और बाद में मजे की जिंदगी जी लो। इसलिए मैंने उस वक्त संघर्ष करना चुना और आज मैं आराम की जिंदगी जी रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "18 साल की उम्र के बाद मैंने कॉलेज जाने और लड़कियों के साथ घूमने के बजाय मेहनत का रास्ता चुना। मैं आपको बताऊं, मैं सच में बहुत रोमांटिक लड़का हुआ करता था और मेरी इच्छा थी कि एक गर्लफ्रेंड हो लेकिन फिर सोचा कि 'पापा किसी वजह से ही ये कह रहे हैं कि समय बर्बाद मत करो, मेहनत करो।' इसलिए जब 12वीं पास की तो 18 साल की उम्र में मुंबई आ गया था। मुझे लगता है कि मेरा ये फैसला बिल्कुल सही था। अगर मैं उस वक्त नहीं आता, तो शायद मुझे 29 साल की उम्र तक भी काम नहीं मिलता। देखिए, मैं सही उम्र में आ गया और 21 साल की उम्र में मैं 'सा रे गा मा' कर रहा था। मैंने टेलीविजन की शुरुआत भी देखी और उस लहर को पकड़ लिया था।"

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Created On :   5 Aug 2026 4:26 PM IST

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