राहुल गांधी ने छात्रों से पूछा, 'शिक्षा व्यवस्था ने आपके सपनों को कैसे रोका?', सुझाव भी मांगा
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों से अनुरोध किया है कि वे वेबसाइट पर जाकर यह बताएं कि क्या देश की शिक्षा व्यवस्था ने उन्हें वह भविष्य दिया, जिसका वादा किया था?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा है, "क्या देश की शिक्षा व्यवस्था ने आपको वह भविष्य दिया, जिसका वादा किया था?" बिल्कुल नहीं, यह देशभर के करोड़ों छात्रों का जवाब है। पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और अवसरों की कमी जैसी समस्याओं ने उनके सपनों पर लगाम लगा रखी है। आपका रास्ता किसने और कैसे रोका है?
इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक लिंक शेयर किया है, जहां जाकर छात्र अपनी राय दे सकते हैं। इसके लिए छात्रों को नाम, नंबर, क्षेत्र, जिला आदि के साथ अपनी एक फोटो भी शेयर करनी होगी।
राहुल गांधी द्वारा शेयर की गई वेबसाइट पर लिखा है, "हमारी शिक्षा व्यवस्था में क्या कमी है?" हम जिस भी शहर में 'छात्रों की गूंज' लेकर जाते हैं, वहां हमें कुछ नया सीखने को मिलता है। शिक्षा से जिंदगी बदलने का सपना अब हकीकत नहीं रहा और अच्छी शिक्षा तक पहुंच कुछ ही लोगों तक सीमित है।
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम इंदौर में प्रस्तावित है। इंदौर स्टेडियम का उपयोग करने की अनुमति न मिलने के बाद, कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए शहर में एक वैकल्पिक स्थान किराए पर लेने के लिए 10 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया। भाजपा पर घबराहट के कारण जानबूझकर अनुमतियों में देरी करने का आरोप लगाते हुए, कांग्रेस नेताओं ने पुष्टि की कि पार्टी ने कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण से क्षेत्रीय पार्क के सामने 12,000 वर्ग मीटर भूमि का तीन दिवसीय पट्टा हासिल कर लिया है।
बता दें कि इससे पहले 11 सितंबर को राहुल गांधी ने छात्रों से कहा था, "मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के जेनजी, आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझाकर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच इंदौर में रहूंगा। मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी जरूरी है।"
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Created On :   12 Sept 2026 4:48 PM IST












