रेल कनेक्टिविटी के लिए 10,021 करोड़ रुपए की पांच परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, पीएम मोदी बोले- मिलेगा फायदा

रेल कनेक्टिविटी के लिए 10,021 करोड़ रुपए की पांच परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, पीएम मोदी बोले- मिलेगा फायदा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने दक्षिण भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से 10,021 करोड़ रुपए की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में रेल संपर्क बेहतर होगा और भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने दक्षिण भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से 10,021 करोड़ रुपए की लागत वाली पांच महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में रेल संपर्क बेहतर होगा और भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से दक्षिण भारत में रेल संपर्क और मजबूत होगा तथा लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट का यह निर्णय यात्री आवाजाही को तेज करने, कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में सहायक साबित होगा।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं में अरक्कोनम - रेनिगुंटा तीसरी और चौथी रेल लाइन (77 किमी), व्हाइटफील्ड - बंगारपेट तीसरी और चौथी रेल लाइन (47 किमी), होसुर - ओमालूर रेलखंड का दोहरीकरण (147 किमी), सलेम - करूर - डिंडीगुल रेलखंड का दोहरीकरण (159 किमी), सिकंदराबाद (घाटकेसर) - काजीपेट मल्टीट्रैकिंग परियोजना (110 किमी) शामिल हैं।

इन सभी परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की समयबद्धता, परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता में सुधार आएगा।

क्षमता विस्तार के बाद रेलवे को प्रतिवर्ष 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी। इससे कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरकों के परिवहन को गति मिलेगी।

इन परियोजनाओं से लगभग 2,121 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जहां करीब 52 लाख लोग निवास करते हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक रेल पहुंच आसान होगी। इनमें तिरुपति, तिरुत्तानी स्थित सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, पद्मावती अम्मावारी मंदिर, कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, होसुर किला, मेट्टूर बांध, कोडाइकनाल हिल्स, सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल किला, यादगिरिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे प्रसिद्ध स्थल शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल है। इन परियोजनाओं के माध्यम से देश के तेल आयात में लगभग 8 करोड़ लीटर की कमी आने की संभावना है। साथ ही 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ माना गया है।

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Created On :   9 Sept 2026 10:14 PM IST

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