राजनीतिक प्रभाव के कारण यौन उत्पीड़न के आरोपी जेएनयू कांग्रेसी प्राध्यापक को बचाया जा रहा एबीवीपी
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जेएनयू इकाई ने जेएनयू में छात्राओं द्वारा एक प्राध्यापक जो कांग्रेस का सांसद भी है, उस पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों पर जेएनयू आईसी और आरोपी कांग्रेसी प्राध्यापक का पुतला दहन किया गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक प्राध्यापक के विरुद्ध कई छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा एवं शिकायत निवारण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
छात्राओं द्वारा मामले को विश्वविद्यालय की इंटरनल कमेटी (आईसी) के समक्ष रखा गया है और मामले में प्रक्रिया चल रही है। ऐसे गंभीर आरोपों के बीच यह विश्वविद्यालय प्रशासन और वामपंथी जेएनयू आईसी की संवेदनहीनता है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर आक्रोश दर्ज कराया।
एबीवीपी जेएनयू ने इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक दबाव की संभावनाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या आरोपी प्राध्यापक कांग्रेस का सांसद है इसलिए उस पर कार्यवाही नहीं हो रही है? इस प्रकरण में आईसी में वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधि जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा की बात करते हैं, वह किसी भी तरह से महिलाओं के अधिकार की रक्षा करने में समर्थ हैं? ये वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधि जो आईसी में बैठे हैं, वो अपने आकाओं के दबाव में सुनवाई करने में देरी कर रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति, संगठन अथवा राजनीतिक प्रभाव के कारण शिकायतों की जांच प्रभावित हो रही है या सुनवाई में अनावश्यक देरी की जा रही है, तो यह अत्यंत दुखद विषय है। जेएनयू आईसी के वामपंथी प्रतिनिधि जो विद्यार्थियों के द्वारा चुने गए हैं, वे इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं और अपने आकाओं के राजनीतिक दबाव के कारण इस मामले को प्रभावित कर रहे हैं। यह वामपंथियों का असली चरित्र है। वे केवल महिलाओं के अधिकारों की बात ही करते हैं, जबकि वास्तविकता में महिलाओं के अधिकारों को दबाने का इनका इतिहास बहुत पुराना है, और इनके अनेक कार्यकर्ता महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के केस में आरोपी होने के बाद भी बाहर घूम रहे हैं।
एबीवीपी जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि जेएनयू में एक प्राध्यापक पर छात्राओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर एक राजनैतिक संरक्षण के कारण कार्यवाही न होना वामपंथी जेएनयू आईसी और वामपंथी संगठनों का असली चेहरा दिखाता है। यह ही इनका असली चरित्र है। इनके खुद के कई कैडर प्रसन्नाराज से लेकर अकबर चौधरी तक और भी एक लंबी यौन उत्पीड़न के घृणित कृत्य करने वालों की सूची है, तो इस वामपंथी आईसी प्रतिनिधियों से तो किसी भी तरह के त्वरित सुनवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती।
एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि ये वामपंथी संगठन के कैडर जो जेएनयू आईसी में चुन कर बैठे हैं, वो कुछ भी करने में असमर्थ हैं। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। कुछ दिन पूर्व आइसा के एक कैडर पर यौन उत्पीड़न का शिकायत हुआ, पर उस पूरी सुनवाई के दौरान वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधि जो आईसी में चुन कर गए हैं, वो कभी किसी भी सुनवाई में नहीं गए।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   8 Sept 2026 11:27 PM IST












