सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र जारी करें सरकार जीतू पटवारी

सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र जारी करें सरकार  जीतू पटवारी
नर्मदा नदी पर स्थित सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस समझौते में राज्य के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि वार्ता का मुख्य विषय मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से जुड़ा गंभीर विवाद है।

भोपाल, 9 जुलाई (आईएएनएस)। नर्मदा नदी पर स्थित सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस समझौते में राज्य के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि वार्ता का मुख्य विषय मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से जुड़ा गंभीर विवाद है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार ने घुटने टेक दिए हैं और प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों तथा मध्य प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की है। राज्य सरकार को वस्तु स्थिति स्पष्ट करने के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए । कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने संवाददाताओं से कहा है कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है। इसलिए नर्मदा पर पहला अधिकार मध्य प्रदेश की जनता का है। इसके बावजूद सरदार सरोवर परियोजना का सबसे अधिक नुकसान भी मध्य प्रदेश ने ही उठाया।

उन्होंने बताया कि 230 प्रभावित गांवों में से 178 गांव मध्य प्रदेश में जबकि केवल 19 गांव गुजरात में हैं। बांध के कारण मध्य प्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए जबकि गुजरात में यह संख्या लगभग 4,000 परिवार है। मध्य प्रदेश ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि, आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय क्षति का बोझ उठाया है। पटवारी ने कहा कि इन्हीं नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तत्कालीन राज्य सरकार ने 76,69 करोड़ का दावा प्रस्तुत किया था।

आरोप है कि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बड़े दावे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट मध्य प्रदेश सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से गुजरात को लगभग 550 करोड़ देने पर सहमति जता दी। सरकार दावा कर रही है कि उसने 1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर 231 करोड़ में निपटा दिया और 1,268 करोड़ की बचत की है। यह समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और किन अधिकारियों की भूमिका रही, इसका पूरा सच प्रदेश की जनता के सामने आना चाहिए।

उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि सरदार सरोवर बांध के लगभग 7,500 करोड़ के दावे को छोड़कर 1,250 से 1,500 करोड़ के बीच समझौता कैसे किया गया? इतने बड़े निर्णय पर विधानसभा, विपक्ष या प्रदेश की जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? कांग्रेस इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग करती है।

पटवारी ने वर्ष 2019 की उस घटना की याद दिलाई जब आरोपों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाने के लिए सरदार सरोवर बांध को उसकी पूरी क्षमता तक भर दिया गया था,जिसके कारण मध्य प्रदेश के सैकड़ों गांव डूब गए और प्रदेश को भारी मानवीय तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है, सरकारी संपत्तियां बेची जा रही हैं और प्रदेश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

--आईएएनएस

एसएनपी/पीएम

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Created On :   9 July 2026 2:57 PM IST

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