सतलुज फिल्म पर बैन को लेकर भड़के सिख नेता बोले- केरला स्टोरी, कश्मीर फाइल्स चल सकती हैं तो सतलुज क्यों नहीं?

सतलुज फिल्म पर बैन को लेकर भड़के सिख नेता बोले- केरला स्टोरी, कश्मीर फाइल्स चल सकती हैं तो सतलुज क्यों नहीं?
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' विवादों में है और इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के महज 48 घंटों के अंदर हटा दिया गया। इस फैसले के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली इकाई) ने बुधवार को फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने फिल्म देखी। अकाली दल के नेताओं का दावा है कि वे इस फिल्म को घर-घर तक लेकर जाएंगे और जहां से भी उन्हें फिल्म दिखाने की मांग रखी जाएगी, उसे किया जाएगा।

नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' विवादों में है और इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के महज 48 घंटों के अंदर हटा दिया गया। इस फैसले के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली इकाई) ने बुधवार को फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने फिल्म देखी। अकाली दल के नेताओं का दावा है कि वे इस फिल्म को घर-घर तक लेकर जाएंगे और जहां से भी उन्हें फिल्म दिखाने की मांग रखी जाएगी, उसे किया जाएगा।

आईएएनएस से बात करते हुए शिरोमणि अकाली दल दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कहा कि 1947 की आजादी के बाद से सिख समुदाय के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। आजादी के 80 साल बाद भी सरकार ने सिखों के साथ अन्याय किया है।

उन्होंने कहा, “सिखों पर जो जुल्म हुए, उन पर एक फिल्म बनाई गई। पिछले 30 साल में ऐसी कोई फिल्म नहीं बनी। यह लोकतांत्रिक देश है, लोगों को यह जानना चाहिए कि सिखों पर किसने जुल्म किया। सरकार को खुद यह काम करना चाहिए था ताकि लोगों को सच्चाई पता चले और वे सिखों के खिलाफ न खड़े हों।”

सरना ने आगे कहा कि सरकार के बड़े-बड़े अधिकारी गलत सलाह देकर फिल्म पर बैन लगवाने में सफल हो गए। उन्होंने पूछा, “जिस कमेटी में सिख सदस्य ही नहीं हैं, उस कमेटी का क्या फायदा? केवल सिंह ढिल्लों ने कमेटी बनाई है तो उसमें कौन-कौन है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि जो सिख जिंदा रहेगा और वह फिल्म जरूर देखेगा।

वरिष्ठ अकाली नेता मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि फिल्म को सालों तक रोका गया। पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई और महज तीन दिन चलने के बाद बैन लगा दिया गया। उन्होंने तीखा सवाल किया, “कश्मीर फाइल्स और केरला स्टोरी जैसी फिल्में चल सकती हैं तो सतलुज क्यों नहीं चल सकती? यह साफ तौर पर सिखों के इतिहास को दबाने की कोशिश है।”

मंजीत सिंह जी.के. ने कहा, “हम इस फिल्म को दिखाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। हमारा इतिहास सदियों पुराना है। लोग इस फिल्म को देखना चाहतीे हैं, तो इसे क्यों रोका जा रहा है, यह सोचने वाली बात है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गुरुद्वारों से फिल्म दिखाने की फरमाइश आएगी तो वे वहां भी फिल्म दिखाएंगे। फिल्म को घर-घर पहुंचाने का संकल्प भी उन्होंने जताया।

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Created On :   8 July 2026 4:22 PM IST

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