एसजीपीसी ने राम रहीम को मिली पैरोल का किया विरोध, सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप
चंडीगढ़, 26 मई (आईएएनएस)। रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 30 दिन की पैरोल मिल गई है। दो साध्वियों से रेप के मामले में दोषी राम रहीम 9 साल में 16वीं बार जेल से बाहर आया है। उसे बार-बार मिल रही छूटों पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने कड़ा ऐतराज जताया है। एसजीपीसी सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भगवंत सिंह सियालका ने इस फैसले को सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया और हरियाणा सरकार तथा केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मीडिया से बातचीत के दौरान सियालका ने कहा कि जिस व्यक्ति का नाम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से जुड़े मामलों में सामने आया हो और जो हत्या व दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में सजा काट रहा हो, उसे बार-बार पैरोल दिया जाना सरकारों की मंशा पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि इससे सिख समुदाय में गहरा रोष है।
सियालका ने आरोप लगाया कि राम रहीम और उसके डेरा से जुड़े कई लोगों के नाम बेअदबी मामलों में सामने आए थे, लेकिन इसके बावजूद सरकार उसे विशेष सुविधाएं प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने पहले अकाली दल के खिलाफ माहौल बनाया, लेकिन, अब वही दल राम रहीम के मामले में नरमी बरतते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम रहीम से जुड़े मामलों को फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित करना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। उनके अनुसार, इस मामले में विशेष कानूनी प्रावधान किए गए और सजा से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया। आम कैदियों पर लागू होने वाले नियम राम रहीम पर लागू नहीं किए जा रहे हैं।
एसजीपीसी सदस्य ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने सिख मामलों में हस्तक्षेप करते हुए अलग हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन किया, जबकि पहले एसजीपीसी हरियाणा के गुरुद्वारों, स्कूलों और कॉलेजों को हर वर्ष करोड़ों रुपये की सहायता देती थी।
सियालका ने दावा किया कि देश में चुनावों के दौरान ही राम रहीम को पैरोल दिए जाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने इसे सरकारों का “दोहरे मापदंड” वाला रवैया करार देते हुए कहा कि एक ओर सजा पूरी कर चुके लोगों को भी रिहा नहीं किया जाता, जबकि दूसरी ओर गंभीर मामलों में दोषी व्यक्तियों को लगातार पैरोल दी जा रही है।
उन्होंने बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एसजीपीसी लगातार उनके हक में संघर्ष कर रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
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Created On :   26 May 2026 4:59 PM IST












