अस्पताल की जांच पर उठे सवाल, हीमोग्लोबिन टेस्ट कराने आई नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट तीन बार पॉजिटिव

अस्पताल की जांच पर उठे सवाल, हीमोग्लोबिन टेस्ट कराने आई नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट तीन बार पॉजिटिव
महाराष्ट्र के डोंबिवली के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका का शास्त्रीनगर अस्पताल एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार केडीएमसी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के डोंबिवली के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका का शास्त्रीनगर अस्पताल एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार केडीएमसी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, हिमोग्लोबिन कम होने के कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुंची एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर गर्भवती होने की जानकारी दी गई। परिवार का दावा है कि अस्पताल में उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट एक-दो नहीं बल्कि तीन बार किया गया और तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि, परिवार ने जब बाहर से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया तो रिपोर्ट निगेटिव आने का दावा किया गया। इसके बाद लड़की के गर्भवती होने की बात पर सवाल खड़े हो गए। बीजेपी नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए जांच की मांग की है।

बता दें कि महाराष्ट्र के डोंबिवली में स्थित शास्त्रीनगर हॉस्पिटल में डॉक्टर और नर्सों से मारपीट मामले में शिवसेना के नगर सेवक रमेश म्हात्रे को तड़ीपार कर दिया गया है लेकिन जिन डॉक्टरों के खिलाफ रमेश म्हात्रे ने आवाज उठाई थी। वह डॉक्टर एक बार फिर से सवालों के घेरे में हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित नाबालिग लड़की का हीमोग्लोबिन कम था, इसी वजह से परिवार उसे इलाज के लिए शास्त्रीनगर अस्पताल लेकर पहुंचा था। अस्पताल में उसकी मेडिकल जांच के दौरान परिवार को बिना बताए प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया। परिवार का दावा है कि पहली जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रिपोर्ट पर विश्वास नहीं होने के बाद दोबारा जांच की गई लेकिन दूसरी और तीसरी जांच में भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की बात परिवार की ओर से कही गई है। इसके बाद परिवार ने बाहर से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीदकर जांच की। इस जांच में रिपोर्ट निगेटिव आने का दावा किया गया है।

प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग लड़की को काफी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार के मुताबिक, करीब 24 घंटे तक वह मानसिक तनाव में रही और लगातार रोती रही। परिवार का कहना है कि लड़की बार-बार यह सवाल कर रही थी कि जब उसने ऐसा कुछ नहीं किया, तो उसके साथ इस तरह की स्थिति क्यों पैदा हुई। इस पूरे घटनाक्रम के कारण लड़की और उसके परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

भाजपा नगर सेवक दीपेश म्हात्रे ने सवाल उठाया है कि नाबालिग लड़की की प्रेग्नेंसी टेस्ट करने से पहले क्या उसके माता-पिता को उचित जानकारी दी गई थी। अस्पताल पर माता-पिता को विश्वास में लिए बिना प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके साथ ही अस्पताल में की गई जांच, प्रयोगशाला की रिपोर्ट और बाहर की जांच में सामने आए कथित अंतर की जांच करने की मांग की गई है।

मामले को लेकर दीपेश म्हात्रे ने मांग की है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या गलती सामने आती है, तो संबंधित डॉक्टरों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल में प्रेग्नेंसी टेस्ट की रिपोर्ट तीन बार पॉजिटिव कैसे आई और बाहर की जांच में रिपोर्ट निगेटिव कैसे आई। क्या रिपोर्ट में तकनीकी गलती हुई, मानवीय चूक हुई या जांच प्रक्रिया में कोई कमी रही, इसकी जांच होना जरूरी है।

इस कथित घटना के बाद केडीएमसी की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवार और दीपेश म्हात्रे की ओर से अस्पताल की जांच प्रक्रिया, प्रयोगशाला रिपोर्ट और संबंधित मेडिकल दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। अब इस मामले में केडीएमसी प्रशासन और शास्त्रीनगर अस्पताल की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और जांच के बाद रिपोर्ट में अंतर की असली वजह क्या सामने आती है, इस पर सभी की नजर है।

नगर सेवक दिपेश म्हात्रे के आरोपों के बाद केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मुख्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने जानकारी दी कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डॉ दीपा शुक्ला ने बताया कि 30 जुलाई को एक लड़की शास्त्रीनगर अस्पताल में अपनी मां के साथ हेवी ब्लीडिंग की शिकायत लेकर आई थी। डॉक्टर के सलाह के अनुसार उसे एडमिट होने के लिए बताया गया था। अस्पताल में एडमिट होने के बाद उसके कुछ टेस्ट होने थे। इस दौरान उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट भी किया गया, जो पॉजेटिव आई थी। इसके लिए लड़की की प्रेग्नेंसी टेस्ट कई बार दोहराई गई थी और इसकी पुष्टि के लिए सोनोग्राफी कराने की भी सलाह दी गई थी।

हालांकि, लड़की के माता-पिता के अनुसार, जब उन्होंने प्राइवेट में लड़की की प्रेग्नेंसी टेस्ट कराई, तब वह नेगेटिव आई थी। उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना के लिए एक कमेटी की गठन की गई ताकि पूरी मामले की जानकारी मिल सकें। इसके अनुसार हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

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Created On :   12 Aug 2026 5:21 PM IST

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