शुभांशु शुक्ला ने साझा किया कैनेडी स्पेस सेंटर का अनुभव, दिखाई लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए की झलक

शुभांशु शुक्ला ने साझा किया कैनेडी स्पेस सेंटर का अनुभव, दिखाई लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए की झलक
एस्ट्रोनॉट और एयरफोर्स के ऑफिसर शुभांशु शुक्ला सोशल मीडिया पर अक्सर अपने स्पेस जर्नी और ट्रेनिंग से जुड़े अनुभव, जानकारी साझा करते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए के दौरे का अनुभव साझा किया है। उन्होंने इस जगह को अपने ट्रेनिंग और मिशन यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। एस्ट्रोनॉट और एयरफोर्स के ऑफिसर शुभांशु शुक्ला सोशल मीडिया पर अक्सर अपने स्पेस जर्नी और ट्रेनिंग से जुड़े अनुभव, जानकारी साझा करते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए के दौरे का अनुभव साझा किया है। उन्होंने इस जगह को अपने ट्रेनिंग और मिशन यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

शुभांशु शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कई ऐसी जगहों पर जाने का अवसर मिला, जो भविष्य में उनके मिशन का अहम हिस्सा बन सकती हैं। इनमें कैनेडी स्पेस सेंटर का ऐतिहासिक लॉन्च पैड 39ए भी शामिल है। उन्होंने बताया कि वहां पहुंचकर उन्हें एक अलग ही अहसास हुआ, क्योंकि यह वही स्थान है जहां से कई ऐतिहासिक स्पेस मिशन शुरू हुए हैं।

उन्होंने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि लॉन्च टावर के नीचे खड़े होकर ऊपर देखने पर उन्हें वह ऐतिहासिक पल याद आया, जब यहीं से नील आर्मस्ट्रॉन्ग और उनके साथी चांद की यात्रा पर रवाना हुए थे। उनके अनुसार, भले ही इस लॉन्च पैड को समय के साथ आधुनिक तकनीक के अनुसार बदला गया हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान आज भी साफ महसूस होती है।

शुभांशु शुक्ला ने यह भी बताया कि वहां एक खास लिफ्ट है, जिसमें केवल दो बटन हैं-‘अर्थ’ यानी पृथ्वी और ‘स्पेस’ यानी अंतरिक्ष। उन्होंने कहा कि यह साधारण दिखने वाला डिजाइन भी लॉन्च के दिन एक गहरा अर्थ और भावनात्मक अनुभव देता है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लॉन्च पैड के ऊपरी हिस्से का भी जिक्र किया, जहां से फाल्कन 9 रॉकेट को लॉन्च से पहले देखा जाता है। उन्होंने बताया कि रॉकेट को पहले क्षैतिज स्थिति में लाया जाता है और फिर लॉन्च से पहले उसे सीधा खड़ा किया जाता है। उस जगह खड़े होकर भविष्य में होने वाले मिशन की कल्पना करना उनके लिए बेहद रोमांचक अनुभव था।

शुक्ला ने यह भी लिखा कि पिछले साल ठीक इसी समय जो घटनाएं हो रही थीं, वे अब उन्हें दूर और बेहद करीब दोनों तरह से महसूस होती हैं। उनके अनुसार, यह अनुभव उन्हें स्पेस जर्नी की गंभीरता और रोमांच दोनों का एहसास कराता है।

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Created On :   14 Jun 2026 11:15 PM IST

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