तिग्मांशु धूलिया और इरफान खान की अनोखी दोस्ती; एनएसडी से शुरू हुआ सफर सिनेमा के लिए बना यादगार

तिग्मांशु धूलिया और इरफान खान की अनोखी दोस्ती; एनएसडी से शुरू हुआ सफर सिनेमा के लिए बना यादगार
हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने कहानियों को बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारा। उनके करियर में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ रिश्ते बेहद खास बन गए। इन्हीं खास नामों में शामिल रहा इरफान खान का नाम, जिनके साथ तिग्मांशु का जुड़ाव एनएसडी के दिनों से शुरू हुआ और आगे चलकर भारतीय सिनेमा की कुछ यादगार फिल्मों तक पहुंचा। तिग्मांशु धूलिया अक्सर इंटरव्यूज में इरफान को लेकर एक बात दोहराते थे कि 'वह अभिनय नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं।'

मुंबई, 2 जुलाई (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने कहानियों को बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारा। उनके करियर में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ रिश्ते बेहद खास बन गए। इन्हीं खास नामों में शामिल रहा इरफान खान का नाम, जिनके साथ तिग्मांशु का जुड़ाव एनएसडी के दिनों से शुरू हुआ और आगे चलकर भारतीय सिनेमा की कुछ यादगार फिल्मों तक पहुंचा। तिग्मांशु धूलिया अक्सर इंटरव्यूज में इरफान को लेकर एक बात दोहराते थे कि 'वह अभिनय नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं।'

तिग्मांशु धूलिया का जन्म 3 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वह एक शिक्षित परिवार से आते हैं। उनके पिता केसी धूलिया वकील थे और बाद में जज बने जबकि उनकी मां सुमित्रा धूलिया संस्कृत की प्रोफेसर थीं। घर में पढ़ाई का माहौल था लेकिन तिग्मांशु का मन शुरू से ही कहानियों, थिएटर और अभिनय की ओर था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई इलाहाबाद में की और बाद में देहरादून और फिर वापस इलाहाबाद में शिक्षा पूरी की।

पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव थिएटर की तरफ बढ़ा। वह कॉलेज में नाटकों में हिस्सा लेने लगे और धीरे-धीरे अभिनय की दुनिया को समझने लगे। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी), दिल्ली में एडमिशन लिया और 1989 में थिएटर में मास्टर्स पूरा किया। यही वह समय था जब उनकी मुलाकात इरफान खान से हुई। दोनों ने एक ही माहौल में अभिनय की ट्रेनिंग ली, संघर्ष को करीब से देखा और कला को गहराई से समझा।

एनएसडी के बाद तिग्मांशु ने फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर की। 1990 में उन्होंने 'बैंडिट क्वीन' में काम किया। इसके बाद वह असिस्टेंट डायरेक्टर, लेखक और टीवी प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे। दूसरी तरफ इरफान खान भी टीवी और छोटे रोल्स से अपने करियर को आगे बढ़ा रहे थे।

तिग्मांशु धूलिया का बड़ा ब्रेक तब आया जब उन्होंने 2003 में फिल्म 'हासिल' का निर्देशन किया। यह फिल्म कॉलेज पॉलिटिक्स और युवा संघर्ष पर आधारित थी। इसी फिल्म में उन्होंने इरफान खान को कास्ट किया और यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक बन गई।

तिग्मांशु अक्सर इंटरव्यू में कहते थे कि इरफान में एक अलग तरह की सच्चाई थी। वह अभिनय नहीं करते थे बल्कि किरदार में ढल जाते थे। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में इरफान खान को प्राथमिकता दी। उनकी 'पान सिंह तोमर' फिल्म में इरफान खान ने एथलीट की जिंदगी को पर्दे पर पेश किया। इस फिल्म के जरिए उन्हें 2012 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिला।

तिग्मांशु धूलिया ने इसके बाद 'साहेब बीवी और गैंगस्टर', 'बुलेट राजा' और 'मिलन टॉकीज' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इसके साथ ही उन्होंने 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में रामाधीर सिंह का किरदार निभाकर अभिनय में भी अपनी पहचान मजबूत की। उनका डायलॉग 'बेटा, तुमसे ना हो पाएगा' आज भी लोकप्रिय है।

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Created On :   2 July 2026 3:56 PM IST

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