ट्रंप ने अमेरिकी सीफूड की पहचान के लिए नई लेबलिंग योजना की घोषणा की

ट्रंप ने अमेरिकी सीफूड की पहचान के लिए नई लेबलिंग योजना की घोषणा की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में उत्पादित समुद्री खाद्य पदार्थ (सीफूड) की पहचान के लिए एक नई लेबलिंग योजना की घोषणा की है। इसका मकसद अमेरिकी मछुआरों और समुद्री खाद्य उद्योग को विदेशी उत्पादकों के मुकाबले बेहतर मौका देना है।

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में उत्पादित समुद्री खाद्य पदार्थ (सीफूड) की पहचान के लिए एक नई लेबलिंग योजना की घोषणा की है। इसका मकसद अमेरिकी मछुआरों और समुद्री खाद्य उद्योग को विदेशी उत्पादकों के मुकाबले बेहतर मौका देना है।

यह घोषणा फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली के दौरान की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी समुद्री खाद्य उत्पादक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पद्धतियों का इस्तेमाल करते हैं और उनके उत्पाद ऐसी परिस्थितियों में अमेरिकी बाजार में आते हैं, जिससे अमेरिकी मछुआरों को नुकसान होता है।

कैनेडी ने कहा कि सरकार एक नया लेबल शुरू करेगी, जिससे यह साफ पता चलेगा कि कौन-सा सीफूड अमेरिका में तैयार किया गया है और कौन-सा विदेश से आया है। उन्होंने कहा, "आज राष्ट्रपति एक ऐसा लेबल घोषित कर रहे हैं जो बताएगा कि यह उत्पाद अमेरिका में बना है, ताकि लोग सही और समझदारी भरा चुनाव कर सकें।"

ट्रंप ने इस पहल को फ्लोरिडा के गल्फ तट पर मौजूद समुद्री उद्योग को समर्थन देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, "आज हम यहां गल्फ ऑफ अमेरिका के तट पर मौजूद एक महत्वपूर्ण उद्योग के समर्थन में ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं।" इसके बाद ट्रंप ने कैनेडी को इस योजना के बारे में विस्तार से बताने के लिए आमंत्रित किया और मछली पकड़ने वाले समुदायों के साथ उनके लंबे जुड़ाव की तारीफ की।

कैनेडी ने कहा कि अमेरिकी मछुआरों को दुनिया के सबसे कड़े पर्यावरणीय और टिकाऊ उत्पादन नियमों का पालन करना पड़ता है। इससे वे उन विदेशी उत्पादकों की तुलना में नुकसान में आ जाते हैं, जिन पर ऐसे नियम लागू नहीं होते। उन्होंने कहा, "इस देश के व्यावसायिक मछुआरों पर सबसे सख्त पर्यावरणीय नियम लागू हैं। उनके लिए टिकाऊ उत्पादन के भी कड़े मानक हैं लेकिन इससे दुनिया के दूसरे मछुआरों के मुकाबले उनकी प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो जाती है।"

कैनेडी ने विशेष रूप से वियतनाम और कंबोडिया में झींगा उत्पादन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ उत्पादक मैंग्रोव जंगलों को नुकसान पहुंचाते हैं और ऐसे रसायनों का इस्तेमाल करते हैं जो कई विदेशी बाजारों में स्वीकार नहीं किए जाते। उनका दावा था कि कुछ जगहों पर मैंग्रोव क्षेत्रों को घेरकर वहां मौजूद मछलियों को खत्म कर दिया जाता है और कई मौसमों तक झींगा पालन किया जाता है, जिससे आसपास का पूरा पर्यावरण प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तरीकों से पैदा किए गए झींगों में एंटीबायोटिक और कीटाणुनाशक रसायनों की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।

कैनेडी ने कहा, "इन झींगों में इतनी ज्यादा एंटीबायोटिक और डिसइन्फेक्टेंट होते हैं कि यूरोप के कई देश इन्हें स्वीकार नहीं करते।"उन्होंने दावा किया कि बाद में ऐसे उत्पाद अमेरिका भेजे जाते हैं, जहां घरेलू झींगा उत्पादकों को कम कीमत वाले आयातित उत्पादों से मुकाबला करना पड़ता है। हालांकि, विदेशी उत्पादकों के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में उनके भाषण में कोई सबूत पेश नहीं किया गया।

कैनेडी ने खास तौर पर फोर्ट मायर्स और फ्लोरिडा के पिंक झींगा उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अमेरिकी व्यावसायिक मत्स्य उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि सरकार मत्स्य उद्योग से जुड़ा बुनियादी ढांचा मजबूत करने और घरेलू उत्पादकों के लिए बाजार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है।

कैनेडी के अनुसार, नया लेबल ग्राहकों को यह समझने में मदद करेगा कि वे जो समुद्री उत्पाद खरीद रहे हैं, वह वास्तव में अमेरिका में तैयार किया गया है या नहीं। हालांकि, ट्रंप और केनेडी ने यह नहीं बताया कि यह नई लेबलिंग योजना कब लागू होगी। उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह लेबल लगाना अनिवार्य होगा या स्वैच्छिक।

इसके अलावा, यह भी नहीं बताया गया कि इस योजना की निगरानी कौन-सी संघीय एजेंसी करेगी और किन मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों को 'अमेरिकन-मेड' का दर्जा मिलेगा। समुद्री खाद्य उत्पादों पर मूल देश (कंट्री ऑफ ओरिजिन) की पहचान और लेबलिंग अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण मुद्दा मानी जाती है, क्योंकि इससे ग्राहकों की पसंद, बाजार तक पहुंच और कारोबार की लागत पर सीधा असर पड़ सकता है।

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