तुलु भाषा को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दो; 18 सितंबर की कैबिनेट बैठक से पहले भाजपा विधायक की मांग

तुलु भाषा को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दो; 18 सितंबर की कैबिनेट बैठक से पहले भाजपा विधायक की मांग
कर्नाटक सरकार द्वारा 18 सितंबर को मंगलुरु में कैबिनेट बैठक करने के फैसले के बाद तुलु भाषा को लेकर सियासत तेज हो गई है। कारकला के विधायक और कर्नाटक के भाजपा महासचिव सुनील कुमार करकाला ने सरकार से इस बैठक में तुलु भाषा को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित करने की जोरदार मांग की है।

मंगलुरु, 8 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार द्वारा 18 सितंबर को मंगलुरु में कैबिनेट बैठक करने के फैसले के बाद तुलु भाषा को लेकर सियासत तेज हो गई है। कारकला के विधायक और कर्नाटक के भाजपा महासचिव सुनील कुमार करकाला ने सरकार से इस बैठक में तुलु भाषा को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित करने की जोरदार मांग की है।

सुनील कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "राज्य सरकार ने 18 सितंबर को मंगलुरु में कैबिनेट बैठक करने का फैसला किया है। हालांकि, यह बैठक सिर्फ औपचारिकता और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मैं सरकार से जोरदार अपील करता हूं कि वह इस कैबिनेट बैठक में तुलु भाषा को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित करने का फैसला करे; यह तटीय इलाके के लोगों की दशकों पुरानी भावनात्मक और उचित मांग रही है।"

उन्होंने तुलु भाषा के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा, "तुलु सिर्फ एक भाषा नहीं है; यह तटीय क्षेत्र के रीति-रिवाजों, विचारों, देवी-देवताओं की पूजा और संस्कृति की जान है।"

भाजपा विधायक ने बताया कि जब भाजपा सरकार सत्ता में थी, तब इस दिशा में ठोस काम हुआ था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में डॉ. एम. मोहन अल्वा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। इस समिति का काम तुलु को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की संभावनाओं का अध्ययन करना और रिपोर्ट सौंपना था।

सुनील कुमार के मुताबिक, "इस समिति ने व्यापक अध्ययन किया और सरकार को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि तुलु भाषा को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने में कोई कानूनी या संवैधानिक बाधा नहीं है। हमारी सरकार इस पर आधिकारिक घोषणा करने ही वाली थी कि तभी चुनाव आचार संहिता लागू हो गई, जिससे यह काम नहीं हो सका।"

उन्होंने दावा किया कि इस मामले से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियां पहले ही पूरी हो चुकी हैं और अब फैसला सिर्फ राज्य सरकार को करना है।अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, "तुलु नाडु के लोग 18 सितंबर की कैबिनेट बैठक का इंतजार कर रहे हैं, ताकि मोहन अल्वा समिति की रिपोर्ट को लागू किया जा सके और तुलु को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित करने का फैसला लिया जा सके। इसे पूरा करें।"

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Created On :   8 Sept 2026 11:27 PM IST

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