यूएन मानवाधिकार चीफ ने पाकिस्तान के 27वें संशोधन पर उठाए सवाल, तो घबराए हुक्मरान

यूएन मानवाधिकार चीफ ने पाकिस्तान के 27वें संशोधन पर उठाए सवाल, तो घबराए हुक्मरान
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क के उस बयान पर सफाई पेश की जो 27वें संशोधन को लेकर है। वोल्कर ने इसे जल्दबाजी में अपनाया गया संशोधन करार दिया था।

इस्लामाबाद, 30 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क के उस बयान पर सफाई पेश की जो 27वें संशोधन को लेकर है। वोल्कर ने इसे जल्दबाजी में अपनाया गया संशोधन करार दिया था।

अपनी सफाई में पाकिस्तानी हुक्मरानों ने टर्क की बातों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल सोसाइटी और विशेषज्ञों की राय के बाद बदलाव किए हैं और ऐसे में टर्क का बयान उनकी समझ से परे है।

शुक्रवार को जिनेवा में जारी एक बयान में, ह्यूमन राइट्स चीफ ने कहा कि हालिया संवैधानिक संशोधन पिछले साल के 26वें संशोधन की तरह, कानूनविदों और बड़े सिविल सोसाइटी के साथ बिना किसी सलाह और बहस के अपनाया गया। उन्होंने आगे कहा कि “जल्दबाजी में अपनाए गए” संशोधन ने न्यायपालिका को कमजोर किया है और सेना की जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

उनके इसी बयान पर बौखलाए पाकिस्तान ने सफाई पेश की। कहा, “पाकिस्तान, यूएन हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स की तरफ से पाकिस्तान की संसद के दो-तिहाई बहुमत से पास हुए 27वें संशोधन के बारे में जताई गई आशंकाओं पर ऐतराज जताता है। दुनिया के दूसरे संसदीय लोकतंत्रों की तरह कानून बनाना और संविधान में बदलाव पाकिस्तान के लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों का खास अधिकार क्षेत्र है।"

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान मानवाधिकार उच्चायुक्त के काम को पूरी अहमियत देता है, लेकिन यह अफसोस की बात है कि जारी किए गए बयान में जमीनी हकीकत नहीं दिखाई गई है। पाकिस्तान की संसद में अपनाए गए संवैधानिक बदलावों में संविधान में बताए गए सही तरीकों का पालन किया गया है।

आगे कहा कि लोकतंत्र और लोकतांत्रिक तरीके “नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की नींव हैं, और इसलिए उनका सम्मान किया जाना चाहिए।” दावा किया कि वो पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक मानवाधिकार, मानव सम्मान, आजादी और कानून राज की रक्षा करने वाले सिद्धांतों के प्रति समर्पित है।

अंत में विदेश मंत्री इशाक डार के कार्यालय ने अपील की कि उनके फैसले का सम्मान किया जाए।

हाल ही में 27वें अमेंडमेंट को इस महीने की शुरुआत में बड़े विरोध के बीच संसद ने जल्दबाजी में पारित कराया। सबसे बड़ी चिंताओं में संघीय कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट बनाकर न्यायपालिका तंत्र में बड़ा बदलाव करना और आर्टिकल 243 में बदलाव करना शामिल रहा, जिसमें आर्मी की अहमियत बढ़ी है और आर्मी चीफ को पाकिस्तान की आर्म्ड सर्विसेज में सबसे ऊपर नए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के तौर पर जगह मिली है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   30 Nov 2025 3:32 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story