उत्तराखंड पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक
देहरादून, 19 मई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के आकस्मिक निधन पर राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दिवंगत नेता के सम्मान में प्रदेशभर में सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
अपर सचिव महावीर सिंह चौहान द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 19 मई से 21 मई तक पूरे राज्य में राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि मेजर जनरल खंडूरी का अंतिम संस्कार 20 मई को पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। अन्त्येष्टि के दिन राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहेंगे।
यह आदेश राज्य के सभी प्रमुख सचिवों, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को भेजा गया है, ताकि निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड की राजनीति के एक प्रमुख और सम्मानित नेता रहे हैं। उनके निधन से प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स में एक प्रतिष्ठित अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं और अपने सख्त अनुशासन व उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता के लिए विशेष पहचान बनाई।
इसके बाद, उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा।
इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे 16वीं लोकसभा में उत्तराखंड के गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद भी रहे।
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।
सीएम ने आगे लिखा कि राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
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Created On :   19 May 2026 11:14 PM IST












