'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने में मील का पत्थर साबित होगा सीपीए सम्मेलन महिपाल ढांडा

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने में मील का पत्थर साबित होगा सीपीए सम्मेलन महिपाल ढांडा
हरियाणा विधानसभा में सोमवार को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। पहले दिन इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के कामकाज, तकनीकी सुधारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

चंडीगढ़, 8 जून (आईएएनएस)। हरियाणा विधानसभा में सोमवार को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। पहले दिन इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के कामकाज, तकनीकी सुधारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

महिपाल ढांडा ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में देश की सभी विधानसभाओं को नौ जोनों में विभाजित किया गया है और हमारा जोन-2 है, जिसमें उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में अगले दो दिनों तक विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे, जिससे विधायकों और अधिकारियों को नई जानकारी और सीख मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा के दौरान यह समझने की कोशिश की जाएगी कि आने वाली चुनौतियां क्या हैं, उनका समाधान कैसे किया जा सकता है और तकनीक का उपयोग करके शासन को कैसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

इसको लेकर हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य केवल एक सपना नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि विधानसभाएं नई तकनीकों को अपनाएं, नवाचार करें और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाएं।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विधानसभाओं को अधिक जनोन्मुखी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। उनका कहना है कि विधानपालिकाओं और जनता के बीच दूरी कम होनी चाहिए ताकि जनता को अधिक सुविधा मिल सके और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके। अंततः यह सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

वहीं, दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां निकलने वाले निष्कर्ष भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। उनके अनुसार ऐसे आयोजन और संवाद लोकतंत्र को मजबूत करते हैं, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना वास्तव में देश को मजबूत करने के समान है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की विभिन्न विधानसभाओं में अलग-अलग प्रकार की कार्यप्रणालियां अपनाई जा रही हैं। कुछ विधानसभाएं पूरी तरह पेपरलेस हो चुकी हैं, जबकि कुछ अन्य डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि सभी विधानसभाएं एक-दूसरे की बेस्ट प्रैक्टिस अपनाएं तो एक समान और मजबूत व्यवस्था विकसित हो सकती है। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी और संसदीय प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।

उन्होंने कहा कि जब सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होती है और विभिन्न विधानसभाएं एक-दूसरे से सीखती हैं तो सिस्टम में एकरूपता और सुधार दोनों आते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छी नीतियों और तकनीकी सुधारों को अपनाकर सभी विधानसभाएं अधिक प्रभावी बन सकती हैं।

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Created On :   8 Jun 2026 11:51 PM IST

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