विपक्ष अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन का प्रयास कर रहा, लेकिन जनता उसे जवाब देगी संबित पात्रा

विपक्ष अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन का प्रयास कर रहा, लेकिन जनता उसे जवाब देगी संबित पात्रा
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद डॉ संबित पात्रा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित किया और कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप पर सबूत मांगे कि सरकार बाहर से आने वाले लोगों को रोक रही है।

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद डॉ संबित पात्रा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित किया और कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप पर सबूत मांगे कि सरकार बाहर से आने वाले लोगों को रोक रही है।

संबित पात्रा ने विपक्षी गठबंधन को परिवारवादी दलों का समूह बताते हुए सीटों के बंटवारे को लेकर विपक्षी दलों के बीच संभावित टकराव की बात कही। उन्होंने समाजवादी पार्टी द्वारा एमएलसी चुनाव में पांच सीटें जीतने का जश्न मनाने और छह सीटों पर धांधली का आरोप लगाने के बीच विरोधाभास पर भी सवाल उठाए।

संबित पात्रा ने कहा कि थोड़ी देर पहले राहुल गांधी और विपक्ष के कुछ नेताओं ने प्रेस वार्ता की थी। इस दौरान उन्होंने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर कुछ गलत बातें कहीं। राहुल गांधी ने मॉक पार्लियामेंट आयोजित नहीं कर पाने के विषय में भी अपनी बात रखी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने एमएलसी चुनाव और विपक्षी एकता को लेकर भी अपनी बात रखी है। विपक्षी दलों के बीच एकता की कमी और संगठनात्मक कमजोरी का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। संभवतः यही कारण रहा कि उन्हें अपनी मॉक पार्लियामेंट स्थगित करनी पड़ी और आज इसका आयोजन नहीं कर पाए। हालांकि, उन्होंने भविष्य में मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने का ऐलान किया है। वैसे तो ये लोकतंत्र के साथ पहले से ही मॉक कर रहे हैं, लेकिन आज जिस मॉक पार्लियामेंट का आयोजन करना था, उसे अब भविष्य में करने की बात कह रहे हैं। यह स्पष्ट है कि विपक्षी दलों में संगठनात्मक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था और समन्वय नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि आज राहुल गांधी ने गलत आरोप लगाए।

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्री दिल्ली के बाहर से आने वाले लोगों को रोक रहे हैं और सरकार उन्हें रामलीला मैदान तक पहुंचने नहीं दे रही है। राहुल गांधी बताएं कि कौन-सा व्यक्ति बाहर से आ रहा है और उसे किस मोड़, किस सड़क या किस नुक्कड़ पर रोका गया है। आज के दौर में लोग मोबाइल फोन से हर घटना की रिकॉर्डिंग कर लेते हैं। मीडिया के साथ-साथ आम लोग भी ऐसी घटनाओं को रिकॉर्ड करते हैं। यदि राहुल गांधी के पास इस बात के सबूत होते कि लोगों को रोका जा रहा है, सड़कें बंद कर दी गई हैं और किसी को आने नहीं दिया जा रहा है, तो क्या वे आज उसका वीडियो नहीं दिखाते?

उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं विपक्ष अपनी कल्पना के अनुरूप व्यवस्था नहीं कर पा रहा है, इसलिए लोगों को आने से रोकने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है, जबकि कहीं भी किसी को आने से नहीं रोका जा रहा है। राहुल गांधी इसके सबूत सामने रखें और देश में इस तरह झूठ और भ्रम का वातावरण न फैलाएं। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने दावा किया है कि विपक्ष में बहुत एकता है और सभी दल मिलकर यह रैली कर रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। ये सभी परिवारवादी पार्टियां खुद को देश का मालिक और भारतवर्ष को अपनी संपत्ति समझती हैं। इन्हें लगता है कि देश केवल इनके परिवारों के आधार पर ही चलना चाहिए। पिछले 12 वर्षों में जब भी उत्तर प्रदेश या लोकसभा के चुनाव आए हैं, इन परिवारवादी पार्टियों ने किसी न किसी निर्धारित स्थान पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एकजुटता दिखाने का नाटक कई बार किया है।

संबित पात्रा ने कहा कि हर चुनाव से पहले कभी बेंगलुरु तो कभी दिल्ली में विपक्षी दलों के नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़कर इस तरह खड़े हो जाते हैं, मानो वे दुनिया के बड़े नेता हों और संयुक्त राष्ट्र के किसी शिखर सम्मेलन में परमाणु शक्ति जैसे गंभीर विषय पर चर्चा करने वाले हों। वे एक-दूसरे को फूल देते हैं। कभी अरविंद केजरीवाल मल्लिकार्जुन खड़गे को फूल देते हैं, तो कभी मल्लिकार्जुन खड़गे अरविंद केजरीवाल को फूल देते हैं। इसके बाद सभी नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़कर इस तरह खड़े होते हैं, मानो वे पूरी दुनिया की व्यवस्था बदलने जा रहे हैं। लेकिन केवल ऐसी तस्वीरों से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी तस्वीरें देश ने 2013 में भी देखी थीं, 2018 के अंत में, 2019 के चुनाव से पहले भी देखीं और 2024 के चुनाव से पहले भी देखी थीं। उत्तर प्रदेश के हर चुनाव से पहले भी पूरे देश ने विपक्षी नेताओं की ऐसी तस्वीरें देखी हैं। मैं इन तस्वीरों को 'हाथ पकड़ी फोटो' कहता हूं। परिवारवादी पार्टियों के नेता एक-दूसरे का हाथ तो पकड़ लेते हैं, लेकिन दिल से एक-दूसरे के साथ नहीं होते। वे हाथ तो पकड़े रहते हैं, लेकिन मन ही मन एक-दूसरे को कोसते रहते हैं कि किसे ज्यादा सीटें मिलेंगी और किसे कम।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले भी दो अच्छे लड़कों की जोड़ी देखी गई थी। आज सब लिखकर रख लीजिए कि सीटों के बंटवारे को लेकर इनके बीच टकराव हो सकता है। अंत में चुनाव के समय सीटों के बंटवारे को लेकर इनके बीच फ्रेंडली मैच देखने को मिलेगा और सभी दल फ्रेंडली मैच के नाम पर चुनाव लड़ेंगे। ये 1 नवंबर को एक-दूसरे का हाथ पकड़ेंगे, लेकिन चुनाव के समय इनकी स्थिति क्या होगी, यह सभी देख लेंगे। एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आज भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में धांधली का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश में भी सपा के कुछ नेता यही आरोप लगा रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि समझ में नहीं आता कि आखिर उनका पक्ष क्या है। एक तरफ सपा पांच सीटें जीतने का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी तरफ छह सीटों पर धांधली का आरोप लगाकर उन्हें हार का हुआ बता रही है। जब सपा खुद पांच सीटें जीतने का जश्न मना रही है, तो फिर धांधली का आरोप क्यों लगा रही है? समाजवादी पार्टी के नेताओं को पहले आपस में बैठक करके यह तय कर लेना चाहिए कि चुनाव में धांधली हुई है या उन्हें जीत मिली है। यदि उन्हें पांच सीटें जीती हैं, तो उन्हें जश्न मनाना चाहिए। वहीं, यदि उन्हें लगता है कि चुनाव में धांधली हुई है, तो उन्हें जश्न मनाना बंद करके जनता के सामने आना चाहिए और बताना चाहिए कि कहां धांधली हुई है। यदि वास्तव में धांधली हुई है, तो जश्न मनाने के बजाय उसे इसकी शिकायत करनी चाहिए।

डॉ पात्रा ने कहा कि वोट चोरी का पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। कई बार दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है। इसके बावजूद मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने, रामलीला मैदान में अराजकता फैलाने के लिए लोगों को बुलाने और मार्च या रैली निकालने की बात की जा रही है। पहले रैली की बात कही जा रही थी, लेकिन अब मार्च निकालने की बात हो रही है। राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और कुछ विपक्षी नेता इस तरह माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि वे जनता के बीच सही तरीके से कभी जीत हासिल नहीं कर सकते। इसलिए विपक्ष के नेता अराजकता फैलाकर किसी भी तरह सत्ता परिवर्तन का प्रयास करना चाहते हैं लेकिन जनता उन्हें सही समय पर इसका उचित जवाब जरूर देगी।

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