विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर टेली-मानस बना सहारा, अब तक 47 लाख से ज्यादा कॉल
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 मनाएगा। इस बार का वैश्विक विषय है 'लिव्ड एक्सपीरिएन्स हर्ड: रीयल वॉइसेज, रीयल चेंज'। सरकार का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवा को सुलभ, किफायती, समावेशी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में काम जारी है।
इस कड़ी में टेली-मानस कार्यक्रम देश की मानसिक स्वास्थ्य सेवा का अहम स्तंभ बनकर उभरा है। टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 के जरिए पूरे भारत में लोगों को मुफ्त, गोपनीय और 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता दी जा रही है।
10 अक्टूबर 2022 को लॉन्च होने के बाद से टेली-मानस पर अक्टूबर 2026 तक 47,75,644 कॉल आ चुके हैं। देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 टेली-मानस सेल काम कर रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि इस सेवा का लाभ महिलाएं भी बड़ी संख्या में ले रही हैं। कुल रिकॉर्ड किए गए 13,35,275 कॉलर्स में 43.78 प्रतिशत यानी 5,84,587 महिलाएं हैं, जबकि 54.18 प्रतिशत पुरुष हैं। इससे पता चलता है कि टेलीफोन परामर्श ने महिलाओं के लिए मदद लेना आसान बनाया है।
सबसे ज्यादा कॉल 18 से 45 साल के युवा और कामकाजी उम्र के लोगों ने किए हैं, जो कुल कॉलर्स का 73.2 प्रतिशत हैं। लोग भावनात्मक परेशानी, चिंता, तनाव, परीक्षा, कार्यस्थल और रिश्तों से जुड़े तनाव और नींद की समस्याओं को लेकर संपर्क कर रहे हैं।
टेली-मानस बहुभाषी सेवा है। इस पर लोग बिना किसी हेल्थ सेंटर जाए, घर बैठे प्रशिक्षित काउंसलर से बात कर सकते हैं। यह सेवा ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के लिए खासतौर पर मददगार है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच मुश्किल है। जरूरत पड़ने पर कॉलर्स को विशेषज्ञ और रेफरल सेवाओं से भी जोड़ा जाता है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर मंत्रालय 'एमएएनएन' जागृति पहल को भी आगे बढ़ा रहा है। इसका मकसद सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना, जल्दी मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को खत्म करना है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य केंद्रों में खुली बातचीत को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जा रहा है। 767 जिलों के लिए जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत आउट पेशेंट सेवा, परामर्श, दवाएं, फॉलो-अप और रेफरल की सुविधा दी जा रही है।
साथ ही देश भर में 1.83 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य टीमें शुरुआती जांच और सहायता दे रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील की है कि मदद मांगने में झिझक नहीं होनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा, हर बातचीत मायने रखती है, हर आवाज सुनी जानी चाहिए। अगर किसी को भी परेशानी है तो वह 14416 पर कॉल कर मुफ्त सहायता ले सकता है।
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Created On :   9 Oct 2026 11:49 PM IST












