वोटर लिस्ट से नाम हटने पर ईसी के पास जाएं, सड़क पर हंगामे से देश की छवि खराब हो रही पूर्व जज करम चंद पुरी
चंडीगढ़, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। 42 रिटायर्ड जजों द्वारा चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ लिखे गए खुले पत्र पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज करम चंद पुरी ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी वोटर का नाम लिस्ट से हटा है तो उसे चुनाव आयोग या अदालत में जाना चाहिए। सड़कों पर हंगामा करने से देश की छवि विदेश में खराब होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 साल बाद वोटर लिस्ट की सफाई जरूरी थी और वोट के अधिकार को राजनीतिक हथियार बनाना गलत है।
42 रिटायर्ड जजों के एक ग्रुप ने चुनाव आयोग और दूसरी संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी देते हुए एक खुला पत्र लिखा। इस पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज करम चंद पुरी ने कहा, "जिसे भी कोई समस्या है, या जिस भी वोटर का वोट लिस्ट से हटाया गया है, अगर वे सामने आते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है और उनकी शिकायत का समाधान किया जाना चाहिए। मेरी राय में, इसका इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए करना पूरी तरह से गलत है और इसे हतोत्साहित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि इसीलिए हम, जिनमें पूर्व जज और सीनियर नौकरशाह शामिल हैं, ने यह पत्र लिखा है। लोकतंत्र तभी बच सकता है जब वोट देने के अधिकार की रक्षा हो। मूल सिद्धांत यह है कि वोट देने का अधिकार छीना नहीं जाना चाहिए। अगर इसे हटाया जाता है तो यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
पूर्व जज करम चंद पुरी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है, जहां कभी तानाशाही नहीं पनपी। आप देख सकते हैं कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है। लोकतंत्र में, जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा हो, तब भी अगर आप संवैधानिक अधिकारियों के लिए इस तरह अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे विदेश में देश की छवि खराब होती है। इसीलिए हमने इस रुख का समर्थन किया है, क्योंकि ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बात यह है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र वोटों से चलता है और इसे रेगुलेट करने के लिए एक सर्वोच्च संस्था बनाई गई, जिसे भारत का चुनाव आयोग कहा जाता है। यह बात सभी जानते हैं। इसकी शक्तियां सुप्रीम कोर्ट के जज से भी ज्यादा होती हैं। इसे संविधान में इसलिए शामिल किया गया था ताकि चुनाव निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी दबाव के हों।
पूर्व जज ने आगे बताया कि इसी वजह से भारत के चुनाव आयोग को शक्तियां दी गईं, जिसका गठन आर्टिकल 324 के तहत किया गया है। पिछली बार इसमें बदलाव 20 साल पहले हुआ था। इन 20 साल में कई वोटरों की मौत हो गई। कुछ की जगह बदल गई। डुप्लीकेट एंट्रीज आ गईं या अलग-अलग वजहों से नाम गलत तरीके से लिस्ट में आ गए। 20 साल बाद उन्हें हटाना बहुत जरूरी था।
उन्होंने कहा कि अगर किसी के वोट चोरी हुए हैं, तो संविधान के मुताबिक क्या उपाय हैं? सबसे पहले, आपको चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए। कोई भी चुनाव आयोग के पास नहीं गया। दूसरा उपाय अदालत है। कोई अदालत भी नहीं गया। इस तरह सड़कों पर हंगामा करने से देश की छवि खराब हो रही है।
पूर्व जज ने कहा कि भारत का लोकतंत्र बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी विकास दर देखकर पड़ोसी देशों या विदेशी ताकतों को जलन होती है। भारत की विकास दर 7.8 फीसदी है, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। किसी और देश की विकास दर इतनी नहीं है। इसीलिए वे ताकतें एकजुट हो जाती हैं और नहीं चाहतीं कि भारत तरक्की करे। जैसा कि आपने पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में देखा है, उन्होंने सरकारों को गिराने के लिए 'जेन जी' का इस्तेमाल किया और उन्हें आगे किया, लेकिन मेरा निजी मानना है कि भारत के लोग, जेन जी, जेनरेशन अल्फा बहुत समझदार हैं।
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Created On :   9 Oct 2026 11:09 PM IST












