आम आदमी पार्टी : पंजाब में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से खराब कपास का मुआवजा देने की मांग

September 22nd, 2021

हाईलाइट

  • पंजाब में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से खराब कपास का मुआवजा देने की मांग

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी ने गुलाबी सुंडी के कारण कपास की फसल को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए पंजाब सरकार से कपास बेल्ट का मूल्यांकन कर प्रभावित किसानों को शत प्रतिशत मुआवजा देने की मांग की है। आप कहा है कि बीटी कपास के बीज और कीटनाशकों की किस्म की हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच करायी जाये । आप पार्टी के विधायक एवं किसान विंग के प्रधान में कुलतार सिंह संधवां और पार्टी प्रवक्ता बलजिंदर कौर कल यहां कहा कि कपास की बुवाई का समय निकल चुका है। और अब नई फसल की बुवाई नहीं की जा सकती है, इसलिए सरकार को किसानों को फसल के पूरे नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कपास बेल्ट बठिंडा, मानसा, मुक्तसर साहिब, फाजिल्का और राज्य के अन्य जिलों में गुलाबी सुंडी का हमला पिछली बादल सरकार के समय 2015 के सफेद मक्खी कीटनाशक घोटाले के समान है। कांग्रेस सरकार की लापरवाही के कारण मालवा बेल्ट में पूरी कपास की फसल नष्ट हो गई है। किसानों के दर्जनों बार कीटनाशक का छिड़काव करने के बाद भी गुलाबी सुंडी का प्रकोप खत्म नहीं हो रहा है।

 

बीटी कपास के बीज और कीटनाशकों की किस्मों पर आप नेताओं ने कहा कि मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। किसानों के साथ यह एक और घोटाला है जिसके कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से नुकसान उठाना पड़ा है। जिस तरह बादल सरकार के समय नकली व बेअसर दवाओं के चलते सफेद मक्खी ने खेती को तबाह कर दिया था, उसी तरह आज गुलाबी सुंडी भी खेती को तबाह कर रही है,जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

 

श्री संधवां और प्रो कौर ने कहा कि किसानों की फसल के नुकसान का आकलन प्रति एकड़ को एक इकाई मानकर किया जाना चाहिए और प्रभावित किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ जमीन का मुआवजा दिया जाना चाहिए। यदि 2015 में बादल सरकार सफेद मक्खी की घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती तो दोबारा ऐसी हरकत करने की किसी की हिम्मत नहीं होती।

 

उनके अनुसार राज्य के किसान पहले से ही कर्ज में डूबे हुए हैं और कई आत्महत्या कर चुके हैं। कांग्रेस सरकार को इस मामले को लेकर तुरंत हस्तक्षेप करते हुए किसानों को उनकी फसल के नुकसान के पूरा मुआवजा देना चाहिए। साथ ही मामले की गहराई से समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

वार्ता