MP News: जी-फाइव ओटीटी प्लेटफार्म की वेबसीरीज सतरंगी-बदले का खेल से पांढुर्ना के रोहित को मिली नई पहचान

जी-फाइव ओटीटी प्लेटफार्म की वेबसीरीज सतरंगी-बदले का खेल से पांढुर्ना के रोहित को मिली नई पहचान
अगर सपनों को पूरा करने की लगन व समर्पण हो तो छोटी जगह से भी बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। यह कहना है पांढुर्ना के ग्राम सिवनी में पले-बढ़े रोहित गजभिए का।

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। अगर सपनों को पूरा करने की लगन व समर्पण हो तो छोटी जगह से भी बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। यह कहना है पांढुर्ना के ग्राम सिवनी में पले-बढ़े रोहित गजभिए का। रोहित ने स्कूली शिक्षा छिंदवाड़ा में प्राप्त की। निफ्ट मुंबई से फैशन टेक्नोलाॅजी की पढ़ाई और काॅर्पोरेट जाॅब के बाद अभिनय को करियर के रूप में चुना। सौ से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके रोहित वर्तमान में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से स्क्रीन एक्टिंग में मास्टर्स कर रहे है। इन दिनों रोहित की सबसे बड़ी पहचान जी-फाईव ओटीटी प्लेटफार्म की वेब सीरीज सतरंगी-बदले का खेल में निभाया गया कजरू का किरदार बन चुका है।

सवालः इन दिनों आपकी वेब सीरीज काफी चर्चा में है। इसके बारे में बताइए। कजरू का किरदार निभाने के लिए किस तरह तैयारी की?

जवाबः जी-फाइव पर रिलीज हुई वेब सीरीज सतरंगी-बदले का खेल को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस सीरीज में मैंने कजरू का किरदार निभाया है। यह मेरे अभिनय करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और इस किरदार ने मुझे दर्शकों के बीच एक नई पहचान दी है। हर किरदार की अपनी अलग दुनिया होती है। कजरू को पर्दे पर जीवंत बनाने के लिए उसके स्वभाव, बोलचाल और परिस्थितियों को समझने की कोशिश की। थिएटर का अनुभव यहां काफी काम आया। दर्शकों को यह किरदार बिल्कुल वास्तविक लगे, इसके लिए पूरी कोशिश की।

सवालः शुरूआत कैसे हुई, अभिनय की दुनिया में आने का विचार कैसे आया, आपका थिएटर अनुभव कैसा रहा है।

जवाबः यहां तक का मुकाम हासिल करने में पिता किशोर गजभिए व माता राजकमल गजभिए का पूरा सहयोग मिला। बचपन पांढुर्ना के ग्राम सिवनी में बीता और स्कूली शिक्षा छिंदवाड़ा में हुई। वर्तमान में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से मास्टर्स इन सिनेमा विद स्पेशलाइजेशन इन स्क्रीन एक्टिंग की पढ़ाई कर रहा हूं। इससे पहले मुंबई यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन थिएटर किया। बचपन से ही फिल्मों व अभिनय के प्रति आकर्षण था। स्कूली शिक्षा के बाद वर्ष 2018 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नालाॅजी (निफ्ट) मुंबई से फैशन टेक्नोलाॅजी की पढ़ाई कर आदित्य ने बिरला ग्रुप में नौकरी भी की। लेकिन मन कहीं ओर था। मुझे हमेशा लगता था कि मेरी असली मंजिल अभिनय व सिनेमा की दुनिया है। इसलिए नौकरी छोड़कर रंगमंच का रास्ता चुना।

सवालः थिएटर की शुरुआत कैसे हुई, अभिनय के अलावा निर्देशन व लेखन से भी आपका जुड़ाव रहा है।

जवाबः मुंबई में रहने के दौरान मेरी मुलाकात रंगमंच कलाकार नीतिश दुबे से हुई। उनसे मुझे थिएटर की बारीकियां सीखने का अवसर मिला। उन्होंने मेरे भीतर के कलाकार को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थिएटर ने मुझे अभिनय की गहराई, अनुशासन और मंच की समझ दी। थिएटर मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब तक मैं सौ से अधिक नाटकों का मंचन कर चुका हूं। अभिनय के साथ-साथ निर्देशन भी किया। मंच पर हर प्रस्तुति ने कुछ नया सिखाया और कलाकार के रूप में मजबूत बनाया। लेखन का भी शौक है। मैंने गहरी खाई नामक पुस्तक लिखी है, जो वर्तमान में अमेजन पर उपलब्ध है।

सवालः एफटीआईआई में पढ़ाई का अनुभव कैसा है, आगे की क्या योजना है और युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहते है।

जवाबः एफटीआईआई देश का प्रतिष्ठित संस्थान है। यहां पढ़ाई करना मेरे लिए गर्व की बात है। संस्थान से जया बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, शत्रुघ्न सिन्हा, नसरूद्दीन शाह, असरानी, शबाना आजमी, राजकुमार राव, जयदीप अहलावत जैसे कलाकार जुड़े रहे है। मेरी पहली प्राथमिकता अभिनय में खुद को और बेहतर बनाना है। कोशिश यही है कि अच्छे और सार्थक किरदारों के माध्यम से दर्शकों के दिलों तक पहुंच सकूं। युवाओं से कहना चाहूंगा कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जुनून, मेहनत और धैर्य है तो आप किसी भी छोटे गांव या कस्बे से निकलकर बड़े मुकाम हासिल कर सकते है।ॉ

Created On :   2 Jun 2026 6:51 PM IST

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